लखनऊ हादसे के बाद रांची में हड़कंप: मौत की घंटी बने दर्जनों कोचिंग सेंटर! संकरी गलियों और बेसमेंट में नियमों की धज्जियां उड़ाकर पढ़ रहे छात्र
रांची। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक कोचिंग हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में मासूम छात्रों की असामयिक मौत के बाद अब झारखंड की राजधानी रांची समेत हजारीबाग, जमशेदपुर और धनबाद जैसे बड़े शैक्षणिक हब में संचालित कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रांची के लालपुर, कांटाटोली, सिरमटोली और सर्कुलर रोड जैसे प्रमुख इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह खुले कोचिंग सेंटरों में नियमों की सरेआम अनदेखी का आरोप लग रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
रांची का लालपुर और सर्कुलर रोड इलाका आज कोचिंग हब बन चुका है, जहाँ झारखंड के कोने-कोने के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार से भी हजारों छात्र अपने सपनों को साकार करने आते हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत डराने वाली है। आरोप है कि दर्जनों नामी-गिरामी संस्थान संकरी गलियों, बेसमेंट और ऊंची बहुमंजिला इमारतों में बिना किसी पुख्ता सुरक्षा इंतजाम के धड़ल्ले से चल रहे हैं। स्थानीय लोगों और परेशान अभिभावकों का साफ कहना है कि इनमें से अधिकांश व्यावसायिक इमारतों में 'आपातकालीन निकास' (इमरजेंसी एग्जिट) की कोई व्यवस्था ही नहीं है। यदि भगवान न करे कभी कोई अनहोनी या शार्ट सर्किट से आग लगती है, तो छात्रों के पास बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता तक उपलब्ध नहीं है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मुनाफा कमाने की होड़ इस कदर मची है कि क्षमता से अधिक छात्रों को एक ही छोटे से हॉल या कक्ष में बैठा दिया जाता है। वेंटिलेशन (हवा के आवागमन) की भारी कमी के कारण कमरों में दमघोंटू माहौल रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी छोटी सी आपदा की स्थिति में ऐसी जगहों पर भगदड़ मचने का सबसे बड़ा खतरा है, जिससे भारी जनहानि हो सकती है। कई बड़े सेंटरों में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) या तो एक्सपायर्ड हैं या फिर उन्हें चलाने वाला कोई स्टाफ ही मौजूद नहीं है। इस चौतरफा घिराव के बीच, कुछ कोचिंग संचालकों ने सफाई देते हुए दावा किया है कि वे नियमों का पालन करते हैं और छात्रों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बहरहाल, धरातल पर बढ़ती चिंताओं के बीच प्रशासनिक सुस्ती पर भी उंगलियां उठ रही हैं। शिक्षाविदों और सुरक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि कोचिंग व्यवसाय के इस अंधाधुंध विस्तार पर लगाम लगाने के लिए नियमित निरीक्षण और कड़े कानूनी अनुपालन की सख्त जरूरत है। अब देखना यह है कि लखनऊ हादसे से सबक लेकर रांची जिला प्रशासन कब नींद से जागता है और इन 'डेथ ट्रैप' बन चुके सेंटरों पर क्या कार्रवाई करता है।