उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में किताबों के साथ अब कॉपियां भी मुफ्त,6 लाख छात्रों को मिलेगा तोहफा
उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए आज का दिन (बुधवार) दोहरी खुशी लेकर आया है। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्य सरकार ने विद्यार्थियों को एक बड़ा तोहफा दिया है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार, सरकारी विद्यालयों के बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकों (बुक्स) के साथ-साथ अब निशुल्क कॉपियां (नोटबुक) भी दी जा रही हैं। समग्र शिक्षा अभियान के तहत अकेले हरिद्वार जिले के करीब छह लाख विद्यार्थियों को इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षा निदेशालय स्तर से कॉपियों की बड़ी खेप जिलों में पहुंचनी शुरू हो गई है। रुड़की स्थित हरिद्वार जिले के 'निशुल्क पाठ्य पुस्तक भंडारण एवं वितरण केंद्र' पर कॉपियों की पहली खेप उतर चुकी है, जिसके बाद बुधवार से स्कूल खुलने के साथ ही बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखरने लगी है।
वितरण केंद्र के प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि सभी कॉपियां उच्च गुणवत्ता की हैं और कक्षावार छात्रों की जरूरत के अनुसार इनका वर्गीकरण किया गया है। केंद्र प्रभारी के मुताबिक, कॉपियों की आपूर्ति तेजी से जारी है। विभाग का लक्ष्य है कि आगामी एक महीने के भीतर जिले के सभी छह लाख नामांकित छात्रों के हाथों में ये निशुल्क कॉपियां सौंप दी जाएं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में छात्रहित में इस अभूतपूर्व योजना की घोषणा की थी। हालांकि, नया सत्र शुरू होने के बाद भी स्कूलों में कॉपियां नहीं पहुंच पाई थीं, जबकि शत-प्रतिशत किताबों का वितरण पहले ही किया जा चुका था। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि देरी की मुख्य वजह तकनीकी थी। निदेशालय स्तर पर राज्य के आठ जिलों के लिए सिर्फ पाठ्य पुस्तकों के ढुलान (परिवहन) का टेंडर जारी हुआ था, जिसमें कॉपियों के परिवहन का जिक्र छूट गया था। इस विसंगति के कारण कॉपियों की सप्लाई अटकी हुई थी। मामले का संज्ञान लेते हुए निदेशालय ने त्वरित कार्रवाई की और पुराना टेंडर लेने वाली कंपनी को ही कॉपियों के परिवहन और सुरक्षित आपूर्ति की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी। सरकार के इस कदम से न केवल गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों का हौसला बढ़ेगा, बल्कि उन अभिभावकों को भी बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी जो कॉपियों-किताबों के बढ़ते खर्च से परेशान रहते थे। बुधवार को स्कूल खुले तो नौनिहालों के बस्ते में नई किताबों के साथ चमचमाती कॉपियां भी नजर आईं, जिससे पूरे प्रदेश के सरकारी शिक्षण संस्थानों में एक सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।