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सिर्फ एक टैग से बन जाती थी किसी भी पब्लिक Instagram प्रोफाइल की AI तस्वीर! प्राइवेसी विवाद गहराने पर Meta ने वापस लिया 'Muse Image' फीचर

editor
  • Awaaz Desk
  • July 11, 2026 09:07 AM
An AI image of any public Instagram profile could be generated with just a single tag! Meta withdrew the 'Muse Image' feature as the privacy controversy intensified.

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में शामिल Meta एक बार फिर अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स को लेकर विवादों में घिर गई है। कंपनी ने हाल ही में लॉन्च किए गए अपने नए AI इमेज जनरेशन फीचर "Muse Image" को भारी आलोचना और निजता संबंधी चिंताओं के बीच बंद करने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनियाभर में AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सुरक्षा, व्यक्तिगत गोपनीयता और डिजिटल अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। Meta ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट के जरिए घोषणा की, कि Muse Image फीचर को तत्काल प्रभाव से हटाया जा रहा है। कंपनी ने कहा कि इस टूल का उद्देश्य लोगों को एक रचनात्मक और उपयोगी AI अनुभव उपलब्ध कराना था, लेकिन कुछ लोगों द्वारा इसके संभावित दुरुपयोग और बढ़ते विरोध को देखते हुए इसे वापस लेना पड़ा।

सिर्फ एक टैग से बन जाती थी AI तस्वीर
Muse Image फीचर की सबसे बड़ी खासियत और सबसे बड़ा विवाद यही था कि कोई भी व्यक्ति केवल एक टेक्स्ट प्रॉम्प्ट लिखकर किसी भी पब्लिक Instagram अकाउंट को टैग कर उसकी AI-जनरेटेड तस्वीर तैयार कर सकता था। यानी संबंधित व्यक्ति की तस्वीरों का इस्तेमाल कर AI नई तस्वीरें तैयार कर देता था। हालांकि Meta का कहना था कि यह केवल सार्वजनिक प्रोफाइल तक सीमित था, लेकिन आलोचकों का तर्क था कि किसी व्यक्ति की तस्वीरों का उसकी स्पष्ट अनुमति के बिना AI मॉडल में इस्तेमाल करना उसकी निजता का उल्लंघन है।

डिफॉल्ट सेटिंग बनी सबसे बड़ा विवाद
विवाद की सबसे बड़ी वजह Meta की डिफॉल्ट सेटिंग रही। कंपनी ने सभी सार्वजनिक Instagram अकाउंट्स को इस फीचर में स्वतः शामिल (Opt-in) रखा था। यदि कोई व्यक्ति अपनी तस्वीरों का AI के लिए इस्तेमाल नहीं चाहता था, तो उसे स्वयं सेटिंग्स में जाकर इस विकल्प को बंद करना पड़ता था। तकनीकी विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकारों से जुड़े संगठनों का कहना है कि किसी भी संवेदनशील फीचर के लिए पहले उपयोगकर्ता की स्पष्ट सहमति (Opt-out नहीं बल्कि Opt-in) ली जानी चाहिए थी। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि Meta ने इस व्यवस्था की पर्याप्त जानकारी अपने यूजर्स को नहीं दी।

गलत इस्तेमाल की बढ़ी आशंका
जैसे-जैसे इस फीचर की जानकारी लोगों तक पहुंची, सोशल मीडिया पर इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ने लगी। लोगों को डर था कि उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी, भ्रामक या आपत्तिजनक AI इमेज बनाई जा सकती हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और निजता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि Meta ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु के यूजर्स और प्राइवेट Instagram अकाउंट्स को इस फीचर से बाहर रखा गया था। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सार्वजनिक अकाउंट होने का अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति उनकी तस्वीरों का AI के लिए स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकता है।

अब AI करता है साफ इनकार
Meta ने फीचर हटाने के बाद अपने AI सिस्टम में भी बदलाव कर दिया है। अब यदि कोई उपयोगकर्ता Meta AI में किसी सार्वजनिक Instagram प्रोफाइल को टैग करके उसकी AI तस्वीर बनाने की कोशिश करता है, तो चैटबॉट ऐसा करने से इनकार कर देता है। कंपनी का कहना है कि यह कदम उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।

हॉलीवुड में भी बढ़ा विरोध
Meta के इस फीचर का विरोध केवल आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा। हॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों और टैलेंट एजेंसियों ने भी इस पर चिंता जताई है। दुनिया की प्रमुख टैलेंट एजेंसी Creative Artists Agency (CAA), जो हॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों का प्रतिनिधित्व करती है, ने भी AI तकनीक के जरिए कलाकारों की छवि और पहचान के अनधिकृत उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। CAA के साथ हॉलीवुड सुपरस्टार टॉम क्रूज़, अभिनेत्री ज़ेंडाया और ऑस्कर विजेता मेरिल स्ट्रीप जैसे कई चर्चित कलाकार जुड़े हुए हैं। इन कलाकारों और उनके प्रतिनिधियों का मानना है कि AI तकनीक का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की छवि बनाने या उसकी नकल तैयार करने से पहले स्पष्ट अनुमति आवश्यक होनी चाहिए।

AI और निजता की बहस फिर तेज
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल Meta तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी AI इंडस्ट्री के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। आज AI तकनीक तेजी से विकसित हो रही है और कंपनियां लोगों की तस्वीरों, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल नए AI मॉडल तैयार करने में कर रही हैं। ऐसे में यह तय करना बेहद जरूरी हो गया है कि उपयोगकर्ताओं के डेटा का इस्तेमाल किन नियमों और किन सीमाओं के भीतर किया जाए। डिजिटल अधिकारों के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में AI कंपनियों को पारदर्शिता, उपयोगकर्ता की स्पष्ट सहमति और मजबूत गोपनीयता नीतियों पर अधिक ध्यान देना होगा। अन्यथा ऐसे विवाद लगातार बढ़ते रहेंगे और तकनीक पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। Meta का Muse Image फीचर भले ही कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया हो, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि AI के दौर में नवाचार जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक लोगों की निजता, सहमति और डिजिटल अधिकारों का सम्मान भी है।


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