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उत्तराखण्ड के चर्चित कर्णप्रयाग प्रकरण में चारों निहंगों को जमानत! गोपेश्वर जिला न्यायालय से मिली राहत

editor
  • Awaaz Desk
  • June 27, 2026 12:06 PM
Bail granted to all four Nihangs in the high-profile Karnaprayag case in Uttarakhand! Relief secured from the Gopeshwar District Court.

चमोली। उत्तराखंड के चर्चित कर्णप्रयाग मारपीट मामले में शनिवार को गोपेश्वर जिला एवं सत्र न्यायालय ने जेल में बंद चारों निहंगों को जमानत दे दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिंध्याचल सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चारों आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का अर्थ मुकदमे का समाप्त होना नहीं है। मामले की सुनवाई न्यायालय में नियमानुसार आगे भी जारी रहेगी और अंतिम निर्णय साक्ष्यों एवं कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा। गौरतलब है कि 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग क्षेत्र में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के बाद हिंसक झड़प हुई थी। घटना के दौरान मारपीट और हमले के आरोप सामने आने पर पुलिस ने चार निहंगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं, जिनमें जान से मारने के प्रयास का आरोप भी शामिल है, के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इस घटना के बाद प्रदेशभर में मामला चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़ी अनेक पोस्ट और प्रतिक्रियाएं तेजी से वायरल हुईं, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना के बाद उत्तराखंड प्रशासन ने स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए। इसी क्रम में शुक्रवार को प्रशासन और निहंग सिख समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

यह वार्ता सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने आपसी संवाद के माध्यम से विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने पर सहमति व्यक्त की। बैठक में निहंग प्रतिनिधियों ने प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें दर्ज मुकदमा वापस लेने, गिरफ्तार निहंगों की रिहाई, वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात तथा पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा शामिल थी। प्रशासन ने इन मांगों पर विचार करने के लिए दो दिन का समय मांगा और उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। वार्ता के बाद प्रदेश में तनाव का माहौल काफी हद तक सामान्य हो गया। निहंग प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्णप्रयाग की घटना में दोनों पक्षों से परिस्थितिवश गलतियां हुईं और अब इस विवाद का समाधान आपसी समझदारी तथा भाईचारे के आधार पर निकाला जाना चाहिए। प्रतिनिधियों ने कहा कि वे समाज में शांति, सद्भाव और प्रेम का संदेश लेकर आए हैं तथा किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करते। बैठक के दौरान निहंग प्रतिनिधियों ने यह भी कहा था कि जब तक गिरफ्तार चारों निहंग सिंहों को न्यायिक राहत नहीं मिल जाती, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे और पांवटा साहिब में ही रुकेंगे। अब अदालत द्वारा चारों आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। इससे पहले प्रशासन और निहंग समुदाय के बीच बनी सहमति ने भी स्थिति को सामान्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


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