बलूनी संभालेंगे उत्तराखण्ड की कमान! पत्रकारिता के दौरान संघ परिवार से नजदिकियां, गुजरात में राज्यपाल के ओएसडी बनने से लेकर मोदी-शाह के करीब पहुंचने तक का दिलचस्प सियासी सफर
उत्तराखण्ड में सीएम चेहरे को लेकर स्थिति लगभग स्पष्ट हो चुकी है और सूत्रों के अनुसार शाम तक अनिल बलूनी के नाम की घोषणा हो सकती है। छात्र जीवन से राजनीति में कदम रखने वाले अनिल बलूनी किसी परिचय के मोहताज नही हैं। भाजपा में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करने वाले अनिल बलूनी ने 28 साल की उम्र में ही राजनीतिक जीवन की शुरूआत कर दी थी। मूलरूप से उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले बलूनी ने पहला विधानसभा चुनाव 2002 में कोटद्वार सीट से लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन किन्ही कारणों के चलते उनका नामांकन निरस्त हो गया। नामांकन निरस्त होने से खफा बलूनी कोर्ट पहुंच गए और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्होंने 2004 में कोटद्वार से उपचुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का समाना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने सियासत नहीं छोड़ी और हमेशा राजनीति में सक्रिय रहे। बता दें कि अनिल बलूनी ने भाजपा में विभिन्न पदों पर रहते हुए जिम्मेदारी संभाली है। निशंक सरकार में बलूनी को वन्यजीवन बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया था। बलूनी इस समय राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह के करीबियों में गिने जाते हैं। अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इस दौरान वह प्रदेश में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार करने उतरे थे, और पूरे दमखम के साथ चुनाव में अपनी सहभागिता दर्ज कराई थी।
आपको यह भी बता दें कि राजनीति के साथ-साथ बलूनी एक कुशल पत्रकार के रूप में भी पहचाने जाते हैं और पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान दिल्ली में संघ परिवार से उनकी नजदिकियां रहीं। संघ के जाने-माने नेता सुंदर सिंह भंडारी से उनकी खासी नजदिकियां हैं और यही कारण है कि जब सुंदर सिंह भंडारी गुजरात के राज्यपाल बनकर आए तो बलूनी उनके ओएसडी थे। उसी समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से उनका मेलजोल बढ़ना शुरू हो गया था। अमित शाह के 2014 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अनिल बलूनी को पार्टी प्रवक्ता और मीडिया प्रकोष्ठ का प्रमुख बनाया गया था।