शादी का 'डिजिटल कार्ड' खोलते ही बैंक खाता साफ! रांची में साइबर ठगों का नया खौफनाक पैंतरा, भूलकर भी न करें यह गलती
रांची। शादी-विवाह के इस सीजन में यदि आपके वॉट्सऐप या किसी अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर किसी करीबी का शादी का कार्ड आता है, तो उसे खोलने से पहले सौ बार सोच लें। राजधानी रांची में इन दिनों ऑनलाइन शादी का डिजिटल कार्ड लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। साइबर अपराधियों ने ठगी और फोन हैकिंग का एक ऐसा खतरनाक और नया पैंतरा आजमाया है, जिससे पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। अपराधी आपके किसी परिचित के नाम का सहारा लेकर मोबाइल पर डिजिटल इनविटेशन भेज रहे हैं, लेकिन इस पर क्लिक करते ही पलक झपकते ही पूरा फोन हैक हो जा रहा है। पिछले महज एक महीने के भीतर रांची में ऐसे दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। इस नए साइबर फ्रॉड की सबसे डरावनी बात यह है कि ये मैसेज अनजान नंबरों से नहीं, बल्कि आपके अपने ही किसी बेहद करीबी के नाम या प्रोफाइल से आ रहे हैं। अपराधियों ने एक खास फॉर्मेट तैयार किया है। मैसेज में भावनात्मक रूप से लिखा होता है-"मेरे बेटे/बेटी की शादी है, आपको सपरिवार जरूर आना है।" इस मैसेज के ठीक नीचे शादी के कार्ड के नाम पर एक फाइल अटैच होती है। लोग अपने परिचित का नाम देखकर बिना सोचे-समझे उस फाइल को डाउनलोड कर लेते हैं। वास्तव में यह कोई इमेज या पीडीएफ फाइल नहीं, बल्कि एक खतरनाक 'APK (एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज)' फाइल होती है। जैसे ही कोई इस फाइल को इंस्टॉल करता है, उसके फोन में एक छिपा हुआ मैलवेयर (वायरस) सक्रिय हो जाता है। इसके बाद ठग घर बैठे ही आपके फोन का पूरा कंट्रोल ले लेते हैं और नेट बैंकिंग ऐप, पासवर्ड, यूपीआई पिन, ओटीपी और कांटेक्ट लिस्ट जैसी संवेदनशील जानकारी चोरी कर लेते हैं। हद तो यह है कि हैकर्स आपके ही नंबर से आपके दोस्तों को मैसेज भेजकर 'एमरजेंसी' के नाम पर पैसे भी मांग रहे हैं।
साइबर अपराधियों की इस नई चाल का शिकार राजधानी के कई आम लोगों के साथ-साथ कई वरिष्ठ पत्रकार भी हो चुके हैं। हाल ही में रांची के एक वरिष्ठ पत्रकार की बेटी की शादी का कार्ड इसी तरह चर्चा और जांच का विषय बन गया। अपराधियों ने उनके नाम का इस्तेमाल कर हवा में कार्ड तैरता छोड़ दिया। कई लोगों को लगा कि यह वास्तविक कार्ड है और देखते ही देखते लगभग १०० से अधिक लोगों ने उस लिंक पर क्लिक कर दिया। नतीजा यह हुआ कि उन सभी के मोबाइल फोन एक साथ हैक हो गए। हालांकि, समय रहते सतर्क होने से कोई बड़ी वित्तीय ठगी तो नहीं हुई, लेकिन फोन हैक होने के कारण लोगों का जरूरी डेटा, फोटो और दस्तावेज हमेशा के लिए उड़ गए, जिससे उन्हें भारी मानसिक और व्यावहारिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साइबर एक्सपर्ट राहुल कुमार ने इस ठगी से बचने का मूलमंत्र साझा करते हुए बताया कि, "लोगों को सबसे पहले फाइल का फॉर्मेट समझने की जरूरत है। कोई भी असली शादी का डिजिटल कार्ड हमेशा पीडीएफ, जेपीजी या पीएनजी (इमेज) फॉर्मेट में होता है। यदि किसी भी निमंत्रण, बिजली बिल, पार्सल डिलीवरी या केवाईसी अपडेट के मैसेज के अंत में apk लिखा दिखाई दे, तो उसे भूलकर भी डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। उसे तुरंत डिलीट कर दें। इंटरनेशनल साइबर पीस फाउंडेशन के अध्यक्ष विनीत कुमार के अनुसार, केवल एपीके फाइल का फोन में आ जाना ही आपको शिकार नहीं बनाता। साइबर अपराधी किसी लोकप्रिय ऐप (जैसे बैंकिंग या चैट ऐप) जैसा नकली सॉफ्टवेयर बनाते हैं। जब उपयोगकर्ता इसे इंस्टॉल करता है, तो स्क्रीन पर 'अनुमति' का विकल्प आता है। यदि आपने अनजाने में संपर्क, एसएमएस, कैमरा और स्टोरेज की परमिशन दे दी, तो आपके फोन की तिजोरी की चाबी अपराधियों के पास चली जाती है। कई मोबाइलों में 'अज्ञात सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन' का विकल्प ऑन रहता है, जिससे यह खतरा और बढ़ जाता है।