• Home
  • News
  • Big Breaking: Chirag Paswan makes a major statement amidst the anti-reservation protest at Jantar Mantar! He asserts—reservation is not charity; it is a constitutional right.

बिग ब्रेकिंगः जंतर-मंतर के आरक्षण विरोधी आंदोलन के बीच चिराग पासवान का बड़ा बयान! बोले- आरक्षण कोई खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार है

editor
  • Awaaz Desk
  • August 24, 2026 09:08 AM
Big Breaking: Chirag Paswan makes a major statement amidst the anti-reservation protest at Jantar Mantar! He asserts—reservation is not charity; it is a constitutional right.

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जातिगत आरक्षण विरोधी आंदोलन के बीच आरक्षण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण के समर्थन में बड़ा बयान देते हुए इसे संविधान प्रदत्त अधिकार बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आरक्षण को केवल किसी के कहने या मांग उठाने से खत्म नहीं किया जा सकता। चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण किसी को दी जाने वाली खैरात नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत इसे खत्म नहीं कर सकती। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग आरक्षण को खत्म करने, उसकी समीक्षा करने या उसमें बदलाव की बात सोचते हैं, उन्हें पहले यह समझना चाहिए कि आरक्षण की जरूरत क्यों पड़ी। आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए चिराग पासवान ने कहा, “क्या आरक्षण को सिर्फ इसलिए खत्म किया जा सकता है क्योंकि कोई ऐसा कहता है? यह एक संवैधानिक अधिकार है। आरक्षण कोई खैरात नहीं है जो किसी को दी जाती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि आरक्षण को कमजोर करने की कोशिशों का वह विरोध करेंगे। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक भेदभाव और असमानता के लंबे इतिहास से जुड़ी हुई है। ऐसे में इसे केवल राजनीतिक बहस या किसी एक मांग के आधार पर खत्म करने की बात नहीं की जा सकती। चिराग पासवान ने अपने बयान के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ उत्तराखंड में हुई घटना का भी जिक्र किया।

उन्होंने सामाजिक भेदभाव से जुड़े उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि देश में आज भी जातिगत भेदभाव की घटनाएं देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय से जुड़े लोगों को आज भी कई जगहों पर सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। चिराग पासवान ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ स्थानों पर दलित युवक को घोड़े पर चढ़ने से रोका जाता है और दलित दूल्हे की शादी की बारात को लेकर भी आपत्तियां सामने आती हैं। उन्होंने मंदिरों में कथित भेदभाव की घटनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि जब बड़े नेता मंदिर जाते हैं तो कभी-कभी परिसर को गंगाजल से धोने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। उनके मुताबिक, ये घटनाएं बताती हैं कि समाज में भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जातियां लंबे समय तक छुआछूत और सामाजिक भेदभाव की शिकार रही हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में आरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि जब तक समाज में भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक सामाजिक न्याय से जुड़ी व्यवस्थाओं की जरूरत बनी रहेगी। चिराग पासवान ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि जब तक वह सरकार का हिस्सा हैं, तब तक आरक्षण की व्यवस्था को कमजोर नहीं होने देंगे। बता दें कि चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर जातिगत आरक्षण के विरोध में आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। आरक्षण को लेकर अलग-अलग संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं।


संबंधित आलेख: