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बिग ब्रेकिंगः छात्रों के प्रोटेस्ट और कॉलेजियम की गोपनीयता पर CJI सूर्यकांत ने रखी बात! बोले- शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा के लिए न्यायपालिका प्रतिबद्ध

editor
  • Awaaz Desk
  • September 26, 2026 11:09 AM
Big Breaking: CJI Surya Kant speaks on student protests and the secrecy of the Collegium! States that the judiciary is committed to upholding the right to peaceful protest.

पटना। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। पटना स्थित चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) में छात्रों के साथ खुले संवाद के दौरान सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस अधिकार का उल्लंघन होता है तो अदालतें मामले से मुंह नहीं मोड़ेंगी। CNLU में सीजेआई ने खुलकर छात्रों से बात की और यह भी स्पष्ट किया कि वे "खुले तौर पर सवाल-जवाब का सत्र" पसंद करते हैं। इस कार्यक्रम में एक छात्रा ने सीजेआई से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल पूछा था। CNLU के बयान के मुताबिक, कार्यक्रम में एक छात्रा ने शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल लिया था। छात्रा के सवाल का संकेत हाल ही में NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों से था। छात्रा के सवाल पर सीजेआई ने कहा कि अगर पुलिस पर छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बेरहमी से दबाने का आरोप है तो अदालतें इस मामले में चुप नहीं बैठेंगी।

उन्होंने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। वहीं, एक अन्य छात्र ने सवाल किया कि कॉलेजियम में अलग राय होने के बावजूद उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता था। सीजेआई ने छात्र के सवाल का जवाब देते हुए साफ कहा कि चाहे कितनी भी अच्छी मंशा क्यों न हो, इसका खुलासा करने से वह इंसान मुश्किल में पड़ सकता है जिस पर विचार किया जा रहा हो। CNLU के बयान के मुताबिक, सीजेआई ने पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विश्वविद्यालय के चांसलर वी. कामेश्वर राव के साथ कैंपस का दौरा किया। CNLU के बयान में कहा गया, "हैदराबाद के NALSAR और बेंगलुरु के NLSIU में सीजेआई के हालिया विरोध को देखते हुए, यह कार्यक्रम बहुत बहुत ही खास था।" सीजेआई ने CNLU के वाइस चांसलर और कानून विशेषज्ञ फैजान मुस्तफा के एक प्रस्ताव की भी सराहना की। उन्होंने इसे "एक नए और स्वागत-योग्य विचार" के तौर पर बताया। इस प्रस्ताव में 5 साल की लॉ की डिग्री को 4 साल की पढ़ाई और आखिरी साल में अनिवार्य कोर्ट अप्रेंटिसशिप में बदला जा सकता है। इससे न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए अलग से एक साल की प्रैक्टिस की जरूरत खत्म हो सकती है।

 


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