बिग ब्रेकिंग नैनीताल : क्या अधिकारियों की शह पर बन रहा नैनीताल कंक्रीट का जंगल देखिये एक्सक्लूसिव खुलासा
नैनीताल एक ऐसा टूरिस्ट प्लेस जहां हर कोई टूरिस्ट जाना चाहता है लेकिन आज नैनीताल को नैनीताल के रहनुमाओं की ही नजर लगती जा रही है नैनीताल लगातार अवैध कंस्ट्रक्शन की भेंट चढ़ता जा रहा है और नैनीताल को बचाने के लिए बनाया गया झील विकास प्राधिकरण अवैध कंस्ट्रक्शन पर महज़ खानपूर्ति करता है जब मीडिया ख़बर के माध्यम से आवाज़ उठाती है तो झील विकास प्राधिकरण कुछ अवैध कंस्ट्रक्शन को सीज़ कर देता है और मीडिया में हीरो बन जाता है लेकिन कुछ ही महीने बाद उसी सीज़ की हुई जगह पर पक्का निर्माण हो जाता है कुछ ऐसा ही आरोप आज झील विकास प्राधिकरण पर लग रहा है जिसके जीते जागते सबूत कह रहे है कि आरोप सच है आपको ये भी बताते चलें कि इस वक्त झील विकास प्राधिकरण के चेयरमैन सोशल मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले आईएएस दीपक रावत है जो कुमाऊँ कमिश्नर भी है और वाइस चेयरमैन आईएएस नरेंद्र सिंह भण्डारी जो इस वक्त कुमाऊँ मण्डल विकास निगम के प्रबंध निदेशक है । बावजूद इसके कोई भी कार्यवाही होती हुई नजर नहीं आती है ।

इस मामले में जब दूरभाष द्वारा जिलाधिकारी धीरज गर्ब्याल से बात की गयी तो उन्होनें ठीकरा झील विकास प्राधिकरण पर फोड़ दिया डीएम गर्ब्याल ने कहा कि अवैध निर्माण को रोकने का दायित्व झील विकास प्राधिकरण का है इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है ।
आपको बता दें नैनीताल को संरक्षित और विकसित करने के लिए झील विकास प्राधिकरण का गठन अविभाजित उत्तर प्रदेश में 1986 में किया गया था तब नैनीताल में मात्र तीन हजार के आस पास भवनों की संख्या थी लेकिन आज इससे कई गुना ज्यादा है ।
सरोवर नगरी नैनीताल में ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण लगातार जारी है । नैनीताल के अति संवेदनशील क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट अयारपाटा में स्थित नैनी रिट्रीट होटल के पास ही भारी भरकम निर्माण कार्य चल रहा है जिसकी शिकायत कई बार सभासद मनोज साह जगाती द्वारा सीएम पोर्टल,जिला प्रशासन, प्राधिकरण ,नगर पालिका इत्यादि को की गई लेकिन सभी खामोश रहे । यहां हो रहे निर्माण कार्य को अब तक नही रोका गया हालांकि झील विकास प्राधिकरण अवैध निर्माण को सील करके गया है लेकिन फिर भी अवैध निर्माण करनेवालों को नहीं रोका जा रहा है । आलम ये हो रहा है कि हरे भरे पेड़ों को भी धड़ाधड़ काटा जा रहा है और पीलर पर पीलर खड़े हो चुके है ।

गौरतलब है कि 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल निवासी पर्यावरणविद प्रो अजय रावत की जनहित याचिका पर नैनीताल में ग्रुप हाउसिंग के साथ ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया था,प्रो अजय रावत की याचिका पर हाईकोर्ट ने भी ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में अवैध निर्माण कार्य पर कार्यवाही के निर्देश दिए थे,लेकिन आज यहां न तो हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हो रहा है न ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का।
इस मामले में प्रो अजय रावत ने कहा कि नैनीताल शहर में जगह जगह अवैध निर्माण कार्य चल रहा है,जो नैनीताल को सुरक्षित रखने के दृष्टिकोण से वन विभाग और जिला प्राधिकरण का उदासीन रवैया प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ग्रुप हाउसिंग और ग्रीन बेल्ट के निर्माण कार्य पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है, डीएन गोधावर्धन अगेंस्ट यूनियन ऑफ इंडिया मामले में कोर्ट ने डिसीजन दिया है कि एक हज़ार मीटर की ऊंचाई के ऊपर निर्माण कार्य में ग्रीन सेलिंग नही होगी जबकि नैनी झील की ऊंचाई 1938 है जो कि कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई ऊंचाई से कहीं ज़्यादा है। उन्होंने ये भी कहा कि प्राधिकरण छोटे मकानों पर तो एक्शन लेता है लेकिन बड़े मकानों पर कोई कार्यवाही नही की जाती । उन्होंने ये भी कहा इन भारी निर्माण कार्यो से पूरे नैनीताल को खतरा है इस ओर जिला प्रशासन, नगर पालिका, प्राधिकरण,पर्यावरण प्रेमी सभी ने चुप्पी साध रखी है।
नैनीताल ने आवाज़ इंडिया की स्पेशल रिपोर्ट