• Home
  • News
  • Big News: Government subsidy of ₹99 lakh for cucumber farming sparks a political row! Opposition raises serious questions; Union Minister issues clarification.

बड़ी खबरः खीरे की खेती पर 99 लाख की सरकारी सब्सिडी से मचा सियासी बवाल! विपक्ष ने उठाए बड़े सवाल, केंद्रीय मंत्री ने दी सफाई

editor
  • Awaaz Desk
  • June 27, 2026 02:06 PM
Big News: Government subsidy of ₹99 lakh for cucumber farming sparks a political row! Opposition raises serious questions; Union Minister issues clarification.

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) की योजना के तहत खीरे की व्यावसायिक खेती (पॉलीहाउस) के लिए करीब 99 लाख 60 हजार रुपये की सरकारी सब्सिडी मिलने के मामले ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने इसे ‘हितों के टकराव’ का मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने एक सामान्य किसान की तरह निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया और आवेदन उस समय किया था, जब वे मंत्री नहीं थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पादुकलां क्षेत्र स्थित भागीरथ चौधरी के पॉलीहाउस प्रोजेक्ट के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा लगभग 99 लाख रुपये की सब्सिडी स्वीकृत की गई है। बताया गया है कि यह सहायता कमर्शियल हॉर्टिकल्चर परियोजना के तहत दी गई है। विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि भागीरथ चौधरी वर्तमान में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री हैं और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से जुड़े पदेन दायित्व भी निभाते हैं। विपक्ष का आरोप है कि ऐसी स्थिति में हितों के टकराव की आशंका पैदा होती है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इस पूरे मामले को मोदी सरकार में हितों के टकराव का बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यदि कृषि मंत्रालय का मंत्री अपने ही मंत्रालय की योजना से लगभग एक करोड़ रुपये की सब्सिडी प्राप्त करता है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है। गहलोत ने आरोप लगाया कि जहां एक ओर सामान्य किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता से जुड़े लोगों को बड़ी वित्तीय सहायता आसानी से मिल जाती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मंत्री स्वयं उस बोर्ड से जुड़े हैं जिसने सब्सिडी स्वीकृत की है, तो इससे पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं। डोटासरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और तथ्य सार्वजनिक करने की मांग की। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में भ्रष्टाचार के नए मॉडल सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी मंत्री को अपने ही मंत्रालय की योजना से इतना बड़ा आर्थिक लाभ मिलता है तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी स्वयं सामने आए और उन्होंने कहा कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बचपन से खेती-बाड़ी से जुड़े रहे हैं और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने पॉलीहाउस परियोजना स्थापित की है। मंत्री ने बताया कि इस योजना के लिए उन्होंने वर्ष 2018 में आवेदन किया था, उस समय वे केंद्र सरकार में मंत्री नहीं थे। भागीरथ चौधरी ने कहा कि उन्होंने किसी प्रकार की जानकारी छिपाई नहीं है। उनके फार्म पर बैंक ऋण और प्राप्त सरकारी सब्सिडी का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके फार्म पर स्थानीय किसानों को प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

क्या है राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना?
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की यह योजना व्यावसायिक बागवानी, पॉलीहाउस और संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। योजना के तहत पात्र किसानों को निर्धारित शर्तों के अनुसार परियोजना लागत का एक हिस्सा सरकारी सहायता के रूप में दिया जाता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार संबंधित परियोजना को इसी योजना के तहत लगभग 50 प्रतिशत सब्सिडी स्वीकृत की गई है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि इसी योजना के तहत एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के परिवार से जुड़े लोगों को भी लाभ मिला है। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।

मामले में राजनीतिक विवाद जारी
फिलहाल कांग्रेस इस पूरे मामले में न्यायिक अथवा स्वतंत्र जांच, सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने तथा हितों के टकराव के पहलू की जांच की मांग कर रही है। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी का कहना है कि उन्होंने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया और उन्हें एक सामान्य किसान के रूप में पात्रता के आधार पर योजना का लाभ मिला है। अब यह मामला केवल कृषि सब्सिडी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पारदर्शिता, सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण और हितों के संभावित टकराव को लेकर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण किसी आधिकारिक जांच अथवा उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगा।


संबंधित आलेख: