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बड़ी खबरः कैंची धाम के जाम से कुमाऊं की अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा असर! बागेश्वर-हल्द्वानी का 6 घंटे का सफर हुआ लंबा

editor
  • Awaaz Desk
  • October 05, 2026 01:10 PM
Big News: Traffic jams at Kainchi Dham are starting to impact Kumaon's economy! The Bageshwar-Haldwani journey now takes much longer than the usual six hours.

बागेश्वर। बाबा नीब करौरी महाराज के प्रसिद्ध कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ अब सिर्फ भवाली और कैंची क्षेत्र तक सीमित समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर कुमाऊं के दूरस्थ जिलों तक दिखाई देने लगा है। भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर कैंची धाम क्षेत्र में आए दिन लगने वाले लंबे जाम से बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के यात्रियों के साथ-साथ व्यापारी, होटल कारोबारी, ट्रांसपोर्टर और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग भी परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और यदि इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो इसका सीधा असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर पड़ेगा। कैंची धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते विशेषकर सप्ताहांत और धार्मिक आयोजनों के दौरान वाहनों का दबाव अचानक बढ़ जाता है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार एक दिन में कैंची धाम में करीब 36 हजार श्रद्धालु पहुंचे। इसके बाद कैंची से निगलाट तक करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार के कारण आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई और इसका असर आगे अल्मोड़ा, कौसानी और बागेश्वर की ओर जाने वाले मार्गों पर भी पड़ा। स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले बागेश्वर से हल्द्वानी तक का सफर करीब छह घंटे में पूरा हो जाता था, लेकिन अब कैंची धाम क्षेत्र में यातायात का दबाव बढ़ने के कारण यात्रियों को रास्ते में कई-कई घंटे फंसे रहना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को लेकर जाने वाले वाहनों और एंबुलेंस को होती है। जाम में फंसने के कारण आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने में देरी का खतरा बना रहता है। कैंची धाम के जाम ने बागेश्वर के व्यापारियों की चिंता भी बढ़ा दी है। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष बबलू नेगी के अनुसार हल्द्वानी और मैदानी क्षेत्रों से बागेश्वर आने वाली सब्जी, दूध, अंडे और अन्य जरूरी सामान की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं। कई बार वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं। इससे खाद्य सामग्री खराब होने का खतरा बना रहता है और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि परिवहन में देरी का असर केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं है। जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होने से ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि स्थिति इसी तरह बनी रही तो आने वाले समय में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।

कैंची धाम के जाम का असर बागेश्वर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल कौसानी पर भी दिखाई दे रहा है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र मेहरा ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में कौसानी पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या पर जाम की समस्या का असर पड़ा है। पर्यटक कौसानी की प्राकृतिक सुंदरता देखने के लिए पहले से होटल और होमस्टे की बुकिंग कराते हैं, लेकिन रास्ते में कैंची धाम क्षेत्र में लंबे समय तक जाम में फंसने के बाद कई पर्यटक अपनी यात्रा रद्द कर देते हैं या दूसरे मार्ग से लौट जाते हैं। इसका सीधा असर होटल, होमस्टे और पर्यटन से जुड़े अन्य कारोबारियों पर पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि पर्यटक यदि समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते तो उनकी बुकिंग प्रभावित होती है और पर्यटन सीजन में कारोबार को नुकसान उठाना पड़ता है। देवभूमि ट्रक ऑनर्स यूनियन उत्तराखंड के महामंत्री प्रकाश रावल ने बताया कि जाम की सबसे ज्यादा मार भारी वाहनों को झेलनी पड़ रही है। उनके मुताबिक हल्द्वानी से कौसानी और बागेश्वर तक पहुंचने में कई बार 25 से 30 घंटे तक लग रहे हैं, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह सफर करीब सात घंटे में पूरा हो जाता था। लंबे समय तक जाम में फंसे रहने से वाहन चालकों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं। व्यापारियों, होटल कारोबारियों और वाहन संचालकों ने प्रशासन से समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई करने वाले वाहनों, मरीजों को ले जाने वाली एंबुलेंस और सार्वजनिक परिवहन के लिए अलग कॉरिडोर की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके साथ ही पर्याप्त पार्किंग, प्रभावी शटल सेवा और यातायात प्रबंधन को मजबूत करने की जरूरत है।


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