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लंदन की जेल में बंद रामनगर के कैप्टन अजय पंत को मिला भारत सरकार का साथ, सांसद अजय भट्ट की पहल पर उच्चायोग सक्रिय

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 26, 2026 03:06 PM
Captain Ajay Pant from Ramnagar, currently imprisoned in London, receives support from the Government of India; High Commission swings into action following MP Ajay Bhatt's initiative.

नैनीताल। लंदन (यूनाइटेड किंगडम) की विनचेस्टर जेल में न्यायिक हिरासत में बंद उत्तराखंड के रामनगर निवासी मर्चेंट नेवी के कैप्टन अजय पंत की सुरक्षित रिहाई और मदद के लिए भारत सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। क्षेत्रीय सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट की विशेष पहल पर लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने कैप्टन पंत को लगातार कांसुलर सहायता (कानूनी व राजनयिक मदद) प्रदान करना शुरू कर दिया है। उच्चायोग ने सांसद अजय भट्ट को आधिकारिक पत्र भेजकर अवगत कराया है कि टीम ने जेल में बंद कैप्टन पंत से सीधा संपर्क स्थापित किया है, और उन्होंने स्वयं को पूरी तरह से स्वस्थ बताया है। इस मामले में मोड़ तब आया जब विगत दिनों कैप्टन अजय पंत की चिंतित पत्नी ने रामनगर में सांसद अजय भट्ट से मुलाकात की थी। उन्होंने अपने पति की सुरक्षा और उन्हें कानूनी मदद दिलाने के लिए भावुक अपील करते हुए गुहार लगाई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सांसद भट्ट ने तुरंत विदेश मंत्रालय और लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग से संपर्क साधकर त्वरित कार्रवाई का अनुरोध किया। इसी तत्परता का नतीजा है कि अब भारत सरकार खुद इस मामले की निगरानी कर रही है। भारतीय उच्चायोग ने सांसद को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में कैप्टन पंत की पत्नी, उनकी कंपनी (नियोक्ता), कानूनी प्रतिनिधियों और ब्रिटिश प्राधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। उच्चायोग ने ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के समक्ष इस मुद्दे को उठाते हुए कैप्टन पंत के मानवीय अधिकारों, कानूनी अधिकारों और जेल के भीतर उनकी सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करने का कड़ा अनुरोध किया है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, कैप्टन अजय पंत के मामले की अगली अदालती सुनवाई आगामी 16 जुलाई 2026 को ब्रिटिश कोर्ट में निर्धारित है। भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि वे अदालती कार्यवाही पर करीब से नजर रख रहे हैं। उच्चायोग ने यह भी आश्वासन दिया है कि इस कठिन समय में कैप्टन पंत और उत्तराखंड में रह रहे उनके परिवार को हर संभव कानूनी सहायता, परामर्श और सहयोग लगातार उपलब्ध कराया जाता रहेगा, ताकि उन्हें जल्द से जल्द न्याय मिल सके।


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