आजमगढ़ हत्याकांड का पूरा घटनाक्रमः घर में चल रहा था महामृत्युंजय जाप, अचानक विवाद बढ़ा तो पत्नी और दो पुरोहितों की जान गई, बच्चों को लेकर कमरे में बंद हुआ अरविंद
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार को एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुए विवाद ने देखते ही देखते खूनी रूप ले लिया। घर में महामृत्युंजय जाप करा रहे पुरोहितों और परिवार के बीच हुए विवाद के बाद अरविंद कुमार सिंह ने अपनी पत्नी बबीता सिंह और अनुष्ठान में शामिल दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी अपने तीन मासूम बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में बंद हो गया और उन्हें बंधक बना लिया। करीब सात घंटे तक चले हाईवोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हो गया और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। वहीं, गोली लगने से गंभीर रूप से घायल उसके बेटे शौर्य सिंह ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस पूरी वारदात में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस और परिजनों के अनुसार, अरविंद के घर में पिछले कई दिनों से धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। परिवार की ओर से भाई सुनील सिंह की आत्मा की शांति और कथित रूप से भूत-प्रेत की बाधा दूर करने के लिए महामृत्युंजय जाप कराया जा रहा था। घटना के दिन अनुष्ठान का चौथा दिन बताया जा रहा है। अरविंद की मां श्यामबला देवी के मुताबिक, उनकी बहू बबीता सिंह तीन पुरोहितों के साथ मिलकर घर में पूजा करा रही थी। मंगलवार शाम करीब साढ़े पांच बजे अरविंद घर पहुंचा। आरोप है कि उसने पूजा करा रहे पुरोहितों से उनके आधार कार्ड मांगने शुरू कर दिए। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। बबीता ने पुरोहितों से इस तरह पूछताछ किए जाने का विरोध किया, जिसके बाद अरविंद आपा खो बैठा। परिजनों के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद अरविंद ने अपनी पत्नी बबीता सिंह को गोली मार दी। इसके बाद घर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे तीन पुरोहितों में से दो पर भी उसने फायरिंग कर दी। इस घटना में अखिलेश मिश्रा और महेंद्र पाठक की मौत हो गई, जबकि तीसरा पुरोहित किसी तरह मौके से भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। एक ही घर में हुई तीन हत्याओं की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं और पूरे इलाके को घेर लिया गया।
तीन बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया आरोपी
तीन लोगों की हत्या करने के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों को लेकर घर के भीतर एक कमरे में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया। उसके पास लाइसेंसी हथियार और कारतूस होने की जानकारी पुलिस को मिली। कमरे में उसका बेटा शौर्य, बेटी परी और करीब छह महीने की बच्ची मौजूद थी। सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी। पुलिस और परिजन लगातार अरविंद को समझाने की कोशिश करते रहे। उसे आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने के लिए कहा गया। करीब सात घंटे तक पुलिस ने बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इस दौरान आरोपी बच्चों को भी नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहा था। पुलिस लगातार कमरे के भीतर की स्थिति पर नजर बनाए हुए थी। कई घंटे तक बातचीत के बाद अचानक कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आई। इसके बाद पुलिस को आशंका हुई कि बच्चों की जान तत्काल खतरे में है। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने का निर्णय लिया। एसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप समेत पुलिस टीम ने कमरे में प्रवेश करने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान स्टन ग्रेनेड और टियर गैस ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया और दरवाजा तोड़कर टीम अंदर दाखिल हुई।
पुलिस के अंदर घुसते ही आरोपी ने कर दी फायरिंग
पुलिस के मुताबिक, जैसे ही टीम कमरे के भीतर पहुंची, अरविंद ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी। उसने कई राउंड गोलियां चलाईं। पुलिस का कहना है कि आरोपी के पास छह राउंड की रिवॉल्वर थी और उसने गोलियां पुलिस टीम की ओर चला दीं। बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा को देखते हुए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। जवाबी फायरिंग में अरविंद घायल हो गया। पुलिस टीम ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस को कमरे में अरविंद का बेटा शौर्य सिंह गंभीर रूप से घायल मिला। उसके शरीर पर गोली लगने की बात सामने आई। पुलिस ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई। इस तरह पहले पत्नी बबीता सिंह और दो पुरोहितों की हत्या, फिर पुलिस कार्रवाई में अरविंद की मौत और उसके बाद घायल बेटे शौर्य की मौत से मृतकों की संख्या पांच हो गई। वहीं, पुलिस ने कमरे से अरविंद की बेटी परी और छह महीने की बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बड़ी बेटी के हाथ के पास मामूली खरोंच आने की जानकारी सामने आई है।
परिवार ने बताई भाई की हत्या के बाद बदली हालत
अरविंद की मां श्यामबला देवी ने बताया कि 12 अक्टूबर 2018 को उनके बड़े बेटे सुनील सिंह की हत्या के बाद से अरविंद काफी परेशान रहने लगा था। परिवार के मुताबिक, सुनील की हत्या का मामला अभी अदालत में लंबित है। मां ने यह भी बताया कि जिस रिवॉल्वर से अरविंद ने वारदात को अंजाम दिया, वह उसके दिवंगत भाई सुनील सिंह की थी और बाद में अरविंद के नाम ट्रांसफर हुई थी। परिवार ने अरविंद की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहने की बात भी कही है। श्यामबला देवी के अनुसार, वर्ष 2015 में बबीता ने पड़ोस के दो लोगों के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में दोनों आरोपियों को 20-20 साल की सजा हुई थी। परिवार का कहना है कि इसी मामले की सुनवाई से पहले सुनील सिंह की हत्या हुई थी। सुनील हत्याकांड का मामला अभी अदालत में लंबित है। पुलिस अब इस पुराने विवाद, पारिवारिक परिस्थितियों, धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुए विवाद और हथियार के इस्तेमाल समेत पूरे घटनाक्रम की अलग-अलग कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है।