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डे-केयर सेंटर में मासूमों से क्रूरता का खुलासाः रोने पर बच्चों को वॉशिंग मशीन में बैठाने और बाथरूम में बंद करने के आरोप, पहली गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया

editor
  • Awaaz Desk
  • July 03, 2026 05:07 AM
Cruelty against young children at a day-care center exposed: Allegations of placing children in a washing machine and locking them in the bathroom when they cried; police have expanded the scope of the investigation following the first arrest.

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के ब्रूकफील्ड स्थित एक डे-केयर सेंटर में दो से तीन साल के मासूम बच्चों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पहली गिरफ्तारी कर ली है। HAL थाना पुलिस ने आरोपी महिला कर्मचारी विजयलक्ष्मी को गिरफ्तार किया है। वह वायरल वीडियो में बच्चों के साथ मारपीट और प्रताड़ना करती हुई दिखाई दी थी। इस मामले में पांच महिला कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि तीन अन्य आरोपियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वे निर्धारित समय पर पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। यह सनसनीखेज मामला तब सामने आया, जब डे-केयर सेंटर के अंदर बच्चों के साथ हो रही प्रताड़ना के कई वीडियो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर वायरल होने लगे। ये वीडियो चाइल्ड हेल्पलाइन तक भी पहुंचे, जिसके बाद तत्काल पुलिस और संबंधित विभाग हरकत में आए। वीडियो में छोटे-छोटे बच्चों को रोते हुए, डरे-सहमे हाल में तथा कर्मचारियों द्वारा उनके साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करते हुए देखा गया।

बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार के गंभीर आरोप
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार डे-केयर सेंटर में दो से तीन वर्ष की आयु के बच्चों के साथ बेहद क्रूर व्यवहार किया जाता था। आरोप है कि रोने वाले बच्चों को डराने-धमकाने के लिए उन्हें वॉशिंग मशीन के अंदर बैठाया जाता था। इतना ही नहीं, कुछ बच्चों को वेस्टर्न टॉयलेट में बैठाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बच्चों के मुंह में टॉयलेट के जेट स्प्रे से पानी डाला गया और उन्हें बाथरूम में बंद कर चुप रहने की धमकी दी जाती थी। बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमंत कुमार सिंह ने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो और डे-केयर सेंटर के सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।

पूरे शहर के डे-केयर सेंटरों की होगी जांच
इस घटना के बाद बेंगलुरु पुलिस ने शहर में संचालित सभी डे-केयर सेंटरों की जांच का निर्णय लिया है। पुलिस यह पता लगाएगी कि कौन-कौन से डे-केयर सेंटर निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं। इसके लिए संबंधित विभाग से शहर के सभी पंजीकृत डे-केयर केंद्रों की सूची मांगी गई है। प्रशासन का मानना है कि यदि कहीं और भी बच्चों के साथ इस प्रकार की लापरवाही या दुर्व्यवहार हो रहा है तो उस पर भी तत्काल कार्रवाई की जाएगी। जिस डे-केयर सेंटर में यह घटना हुई, वह आईटी कंपनी कैपजेमिनी के बेंगलुरु स्थित कैंपस के भीतर संचालित किया जा रहा था। घटना सामने आने के बाद कंपनी ने एहतियात के तौर पर डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वह इस पूरे मामले की जांच में पुलिस को हर संभव सहयोग दे रही है।

महिला अधिकारी को सौंपी गई जांच
मामले की निष्पक्ष और संवेदनशील जांच सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने डिप्टी कमिश्नर (DCP) रैंक की एक महिला अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी डिजिटल साक्ष्यों, वीडियो और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है तथा जांच पूरी होने के बाद अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इधर बेंगलुरु डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार पर कर्नाटक सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि सरकार बच्चों के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा या प्रताड़ना को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' नीति है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अभिभावकों में बढ़ी चिंता
इस घटना के बाद कामकाजी अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि डे-केयर सेंटरों में नियमित निरीक्षण, प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति, सीसीटीवी निगरानी, पारदर्शी संचालन व्यवस्था और समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। बेंगलुरु की यह घटना पूरे देश के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि छोटे बच्चों की देखभाल करने वाले संस्थानों में सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।


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