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तुर्किये में भूकंप के बाद से लापता विजय की मौत, शरीर पर बने टैटू से हुई शव की पहचान, निकला उत्तराखंड का निवासी

editor
  • Awaaz24x7 Team
  • February 12, 2023 09:02 AM
Death of Vijay missing after earthquake in Turkey, body identified by tattoo on body, turned out to be a resident of Uttarakhand

कोटद्वार। तुर्किये और सीरिया में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद से लापता बताए जा रहे भारतीय नागरिक की मौत हो गई। भारतीय दूतावास ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि 36 वर्षीय विजय कुमार गौड़ का शव तुर्किये के मलत्या इलाके में एक चार सितारा होटल के मलबे में मिला था।  उसके परिवार ने एक टैटू के आधार पर उसकी पहचान की।

उत्तराखंड के कोटद्वार के रहने वाले गौड़ बेंगलुरु स्थित ऑक्सी प्लांट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के लिए काम करते थे और जब सोमवार को क्षेत्र में भूकंप आया तो वह तुर्किये की बिजनेस ट्रिप पर थे।

तुर्किये में भारतीय दूतावास ने एक ट्वीट में कहा, ‘हम दुख के साथ सूचित करते हैं कि 6 फरवरी के भूकंप के बाद से लापता हुए एक भारतीय नागरिक विजय कुमार के नश्वर अवशेष मिले हैं। मलत्या में एक होटल के मलबे के बीच उनकी पहचान की गई है, जहां वह एक बिजनेस ट्रिप पर ठहरे हुए थे।’ बयान में कहा गया है कि उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द उनके परिवार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं बताया जा रहा है कि शव यहां तक पहुंचने में 2 से 3 दिन का समय लग सकता है. वहां हवाई सेवा उपलब्ध नहीं है। सड़क मार्ग से इस्तांबुल भेज रहे हैं। वहां से फिर विमान के जरिये दिल्ली आएगा, जहां हम लेने जाएंगे।

उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित आवास पर विजय कुमार के निधन पर परिवार शोक में डूबा हुआ है। उनके परिवार में मां, पत्नी और 6 साल का बेटा है। मृतक के एक दोस्त ने मीडिया से बातचीत में बताया कि विजय के परिवार को एंबेसी से फोन आया था। उन्हें एक बॉडी मिली थी, जिसकी पहचान के लिए कुछ निशान आदि मांग रहे थे। यहां से बताया गया कि उनके हाथ पर एक टेटू है, जिसके बाद पुष्टि हो गई कि हमारे विजय भाई नहीं रहे। उन्होंने बताया कि विजय 22 जनवरी को कंपनी के काम से तुर्की गए थे और 20 फरवरी को उन्हें वापस आना थे, लेकिन भूकंप में उनकी जान चली गई।

विजय के बड़े भाई अरुण ने बताया था कि विजय बेंगलुरु के ऑक्सी प्लांट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी में नौकरी करता था और 22 फरवरी को कंपनी के किसी काम से तुर्किये गया था। भूकंप की खबर मिलते ही उन्होंने अपने भाई का फोन मिलाया, लेकिन घंटी बजती रही और किसी ने उसे नहीं उठाया। अरुण ने बताया कि विजय से पांच फरवरी को आखिरी बार बात हुई थी और उसे 20 फरवरी को वापस आना था।


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