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मौत का गड्ढाः नोएडा में सिस्टम की लापरवाही से गई इंजीनियर की जान! 50 फीट गहरे नाले में 90 मिनट तक मदद के लिए चिल्लाता रहा युवराज, तमाशबीन बना रहा प्रशासन

  • Awaaz Desk
  • January 21, 2026 07:01 AM
Death Pit: A Noida engineer lost his life due to systemic negligence! A young man screamed for help for 90 minutes in a 50-foot-deep drain, while the administration remained a mere spectator.

नोएडा। यूपी के नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की गड्ढ़े में डूबकर हुई मौत का मामला खासा गरमा गया है। इस मामले ने सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नोएडा सेक्टर-150 के गड्डे में गिरकर जान गंवाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के पिता और चश्मदीदों ने जो बातें बताई हैं, वह सिस्टम की लापरवाही के उजागर कर रहे हैं। पिता और चश्मदीदों का कहना है कि थोड़ा-सा भी सपोर्ट मिल जाता तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने कहा कि बेटा जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। हेल्प-हेल्प चिल्ला रहा था, लेकिन पूरा का पूरा सिस्टम तमाशबीन बना हुआ था। दरअसल, युवराज मेहता अपनी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा कार से नोएडा सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क में अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में घना कोहरा था, एक मोड़ पर विजिबिलिटी बहुत कम होने की वजह से उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क से फिसल गई और एक खुले नाले में जा गिरी। यह नाला करीब 50 फीट गहरा था और पानी से भरा हुआ था। हादसे वाली जगह पर न तो कोई बैरिकेड था और न ही कोई रिफ्लेक्टिव चेतावनी बोर्ड, जिससे ड्राइवर को खतरे का अंदाजा हो सके। कार के नाले में गिरते ही युवराज ने हिम्मत दिखाई। वे किसी तरह कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गए। उस वक्त तक कार पूरी तरह नहीं डूबी थी। युवराज ने तुरंत अपने पिता राज कुमार मेहता को फोन किया और बताया कि वे नाले में फंस गए हैं और कार पानी में गिर गई है। उनके पिता ने मीडिया को बताया कि बेटे की आवाज घबराई हुई थी, लेकिन वह खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था। सूचना मिलने के बाद पुलिस, फायर डिपार्टमेंट, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर रवाना हुईं। हालांकि घने कोहरे और खराब हालात के कारण टीमों को पहुंचने में समय लगा। जब तक बचाव दल मौके पर पहुंचा, तब तक युवराज करीब 90 मिनट तक कार की छत पर बैठे रहे। पुलिस के अनुसार, युवराज को बचाने के लिए रस्सियां फेंकी गईं, लेकिन वे छोटी पड़ गईं। फायर ब्रिगेड की सीढ़ियां और क्रेन भी नाले की गहराई और दूरी को पार नहीं कर सकीं।

पिता ने सिस्टम पर लगाए आरोप
युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने कहा कि शुक्रवार देर रात 12 बजे की घटना थी और सुबह छह बजे बचाव शुरू हुआ। उसके एक घंटे बाद शव मिला। मौके पर अधिकारी सक्षम नहीं थे। उनके पास बोट भी नहीं थी, कोई तैराक नहीं था। देर रात ढाई बजे मोबाइल की लाइट दिखनी बंद हो गई। यह नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही है। उनकी मांग है कि मामले में उचित कार्रवाई हो और वहां दोबारा ऐसी कोई घटना न हो इसके लिए पूरा इंतजाम हो।

चश्मदीद का दावा, पानी में नहीं उतरी पुलिस
सेक्टर-150 के पास ही गढ़ी समसपुर गांव के रहने वाले मुनेद्र घटना के वक्त वहीं से सामान डिलीवर करने जा रहे थे। उन्होंने भीड़ देखी। वहां पुलिस भी मौजूद थी। मुनेंद्र ने बताया कि एक लड़का मोबाइल की लाइट जलाकर मदद के लिए चिल्ला रहा था। कोई भी पानी में उतरने को तैयार नहीं था। पुलिस ने भी पानी ठंडा और अंदर सरिया होने का हवाला देते हुए उतरने से इनकार कर दिया था। इसके बाद वह कमर में रस्सी बांध पानी में उतरे। आधे घंटे तक तलाश भी की। 

बिल्डर अभय कुमार गिरफ्तार
इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। नोएडा पुलिस ने नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने रविवार को दो बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन व लोटस ग्रीन खिलाफ मामला दर्ज किया था। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले में संज्ञान लिया, जिसके बाद शासन ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया है, लेकिन अब भी बड़ा सवाल कायम है कि इंजीनियर की मौत के अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?


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