सीजफायर पर सहमति के बावजूद मिडिल ईस्ट में तनाव बरकरार! 40 दिन की भीषण जंग में 3640 मौतें, 90 हजार घर तबाह
नई दिल्ली। करीब 40 दिनों तक चली भीषण जंग के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के सीजफायर पर सहमति बन गई है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे मिडिल ईस्ट में फैल गया और कई देशों को अपनी चपेट में ले लिया। इस युद्ध ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई, जिसमें हजारों लोगों की जान गई और लाखों लोग प्रभावित हुए। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब हिजबुल्लाह ने लेबनान से इजरायल पर रॉकेट दागे और यमन के हूती विद्रोही भी इस संघर्ष में कूद पड़े। देखते ही देखते यह टकराव मिडिल ईस्ट के कई देशों लेबनान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, यूएई और ओमान तक फैल गया।
3640 मौतें, हजारों घायल
इस युद्ध में अब तक कुल मौतों का आंकड़ा लगभग 3640 तक पहुंच चुका है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में 2076 मौतें और 26,500 से ज्यादा लोग घायल हुए। वहीं लेबनान में 1497 मौतें, इजरायल में 26 मौतें, इराक में 109 मौतें, खाड़ी देशों (कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, यूएई, ओमान) में 28 मौतें हुई हैं। वहीं 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 200़ घायल हुए हैं। जॉर्डन, सीरिया और साइप्रस में भी लोगों के घायल होने और सीमित नुकसान की खबरें हैं। वास्तविक आंकड़े इससे ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि कई इलाकों में स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
इमारतों और ढांचे को भारी नुकसान
जंग ने सिर्फ इंसानी जान ही नहीं ली, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी गहरी चोट पहुंचाई है। इस दौरान 90,000 घर पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि 760 स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं 307 अस्पताल या तो बर्बाद हुए या काम करने लायक नहीं रहे। ईरान और लेबनान में सबसे ज्यादा तबाही देखी गई, जहां रिहायशी इलाके, स्कूल और अस्पताल बड़े पैमाने पर प्रभावित हुए।
ऊर्जा संकट और वैश्विक असर
इस युद्ध का असर वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिला। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल परिवहन बाधित होने से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें बढ़ गईं। खाड़ी देशों में तेल-गैस संयंत्र, बंदरगाह और एयरपोर्ट निशाने पर रहे, जिससे ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई।
सीजफायर, लेकिन खतरा बरकरार
7 अप्रैल 2026 के आसपास हुए इस सीजफायर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की शर्त भी शामिल है। हालांकि इजरायल ने साफ किया है कि लेबनान में उसकी सैन्य कार्रवाई इस समझौते से अलग रहेगी। पाकिस्तान में वार्ता की तैयारी हो रही है, लेकिन क्षेत्र की स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है और किसी भी समय तनाव फिर बढ़ सकता है।
भविष्य पर गहरा असर
इस युद्ध ने दिखा दिया कि एक सीमित सैन्य कार्रवाई किस तरह पूरे क्षेत्र को संकट में डाल सकती है। लाखों लोग बेघर हुए, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई और अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा। 90 हजार घरों, सैकड़ों स्कूलों और अस्पतालों की तबाही आने वाली पीढ़ियों पर लंबे समय तक असर डालेगी। फिलहाल सीजफायर से राहत जरूर मिली है, लेकिन मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति अभी भी दूर नजर आ रही है।