बिहार में मौसम का डबल अटैक: 19 जिलों में आंधी-पानी का अलर्ट, कोसी नदी उफान पर; बराज के 11 फाटक खोले
पटना। बिहार में इन दिनों मौसम का बेहद अनोखा और दोहरा मिजाज देखने को मिल रहा है। राज्य का एक हिस्सा जहां भीषण उमस और तपती गर्मी से झुलस रहा है, वहीं दूसरी ओर आधे बिहार पर आंधी-तूफान और बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र पटना के पूर्वानुमान के अनुसार, मंगलवार को राज्य के 19 जिलों में आंधी के साथ भारी बारिश का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। दूसरी तरफ, नेपाल और सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने उत्तर और पूर्वी बिहार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण कोसी और सीमांचल के क्षेत्रों में बाढ़ की आहट से तटबंध के भीतर रहने वाले लाखों लोग खौफजदा हैं।
नेपाल में जारी आसमानी आफत का सीधा असर बिहार की नदियों पर दिखने लगा है। सीमावर्ती नदियों का जलस्तर खतरे के निशान की ओर तेजी से ऊपर आ रहा है। कोसी नदी में पानी का बहाव लगातार बढ़ते क्रम में दर्ज किया जा रहा है, जो करीब 1 लाख क्यूसेक के पास पहुंच गया है। हालात को नियंत्रित करने के लिए कोसी बराज के 11 फाटकों को खोल दिया गया है। आशंका जताई जा रही है कि जलस्तर जल्द ही 1.5 लाख क्यूसेक को पार कर जाएगा, जिससे निचले इलाकों और तटबंध के भीतर बसे गांवों में बाढ़ आने की प्रबल संभावना है। हालांकि, जल संसाधन विभाग की टीमें पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। मौसम विभाग ने उत्तर, पूर्वी और अंग क्षेत्र के 19 जिलों के लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की आशंका है। एक तरफ जहां आधा बिहार पानी-पानी है, वहीं राजधानी पटना, गया और दक्षिण बिहार के बाकी 19 जिलों के लोगों को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। पटना में मंगलवार को आसमान में आंशिक बादल तो दिखेंगे, लेकिन बारिश होने की उम्मीद न के बराबर है। हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) का स्तर बहुत ऊंचा होने की वजह से लोगों को सामान्य से कहीं अधिक पसीने वाली चिपचिपी और उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। राजधानी का अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जिससे दिन के समय लू जैसा अहसास बना रहेगा। आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ प्रभावित संभावित जिलों के कप्तानों को चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।