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पटना इस्कॉन में देव स्नान पूर्णिमा की भव्य तैयारी: 108 स्वर्ण कलशों के गंगाजल से होगा महाप्रभु जगन्नाथ का अभिषेक

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 26, 2026 12:06 PM
Grand preparations at Patna ISKCON for Deva Snan Purnima: Mahaprabhu Jagannath to be consecrated with Ganga water from 108 golden pitchers.

पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित भव्य इस्कॉन मंदिर में आगामी 29 जून को 'देव स्नान पूर्णिमा' का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। सनातन परंपरा और पुरी की प्राचीन मान्यताओं का निर्वहन करते हुए इस विशेष दिन पर भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा का अलौकिक महास्नान अनुष्ठान संपन्न होगा। इस पावन अवसर पर पवित्र गंगाजल से भरे 108 स्वर्ण कलशों से महाप्रभु का अभिषेक किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के इस पावन दिन को भगवान जगन्नाथ का प्राकट्य दिवस भी माना जाता है, जो विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा महाउत्सव की शुरुआत का आधिकारिक प्रतीक है।

पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के मुताबिक, ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में अत्यधिक जल से स्नान करने के कारण प्रभु जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं। यही वजह है कि स्नान पूर्णिमा के ठीक बाद भगवान अगले 14 दिनों के लिए 'एकांतवास' (अनासक्त काल) में चले जाते हैं। इस अवधि के दौरान प्रभु को मंदिर का परंपरागत और भव्य 'छप्पन भोग' नहीं लगाया जाता है। स्वास्थ्य लाभ के लिए उन्हें विशेष आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, फलों के रस, सोंठ और औषधीय काढ़े का भोग अर्पित किया जाता है। इन 14 दिनों में मंदिर के गर्भ गृह में मुख्य पुजारियों और विशेष सेवकों को छोड़कर आम भक्तों या अन्य किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध रहता है। 14 दिनों के कड़े विश्राम और विशेष उपचार के बाद, आगामी 15 जुलाई को महाप्रभु पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने भक्तों को दर्शन देंगे। इस दिन मंदिर में विशेष 'नेत्रोत्सव' और 'नव-यौवन दर्शन' का भव्य आयोजन होगा, जिसमें प्रभु के दिव्य रूप को देखने के लिए जनसैलाब उमड़ेगा। इसके ठीक अगले दिन, यानी 16 जुलाई को पटना की सड़कों पर भगवान जगन्नाथ की भव्य और ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली जाएगी। इस्कॉन मंदिर द्वारा संचालित होने वाली यह रथयात्रा पूरे शहर का मुख्य आकर्षण केंद्र होगी। इस वर्ष रथयात्रा को लेकर बेहद खास तैयारियां की जा रही हैं। महाप्रभु के लिए 40 फीट ऊंचा विशेष हाइड्रोलिक सिस्टम से निर्मित रथ तैयार किया जा रहा है, जिसे देश-विदेश के आकर्षक फूलों और भव्य लाइटों से सुसज्जित किया जाएगा। रथयात्रा के पूरे मार्ग में भक्तों द्वारा पुष्पवर्षा, शंखनाद और महाआरती के साथ भगवान का स्वागत किया जाएगा। सनातन धर्म में मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस पावन रथ की रस्सी को श्रद्धापूर्वक खींचता है, वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर परम पुण्य का भागीदार बनता है। इस महाआयोजन में हिस्सा लेने और रथ खींचने के लिए देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी हजारों श्रद्धालुओं के पटना पहुंचने की उम्मीद है।
 


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