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हल्द्वानीः अधिवक्ता परिषद देवभूमि का प्रथम प्रांत अधिवेशन! पर्यावरण आपातकाल और फोरेंसिक विज्ञान पर गहन मंथन

editor
  • Awaaz Desk
  • June 28, 2026 09:06 AM
 Haldwani: First Regional Conference of Adhivakta Parishad Devbhoomi! In-depth deliberations on environmental emergency and forensic science.

हल्द्वानी। अधिवक्ता परिषद देवभूमि (उत्तराखण्ड) के प्रथम प्रांत अधिवेशन के उद्घाटन सत्र के पश्चात आयोजित विभिन्न सत्रों में संगठनात्मक रणनीति से लेकर पर्यावरण संकट, संघ शताब्दी यात्रा और फोरेंसिक विज्ञान जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। दो दिन चले इन सत्रों में प्रदेशभर से आए अधिवक्ताओं एवं बुद्धिजीवियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

द्वितीय सत्र संगठन विषय पर आयोजित हुआ। इस सत्र में प्रदेशभर के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक संरचना, कार्यकर्ता विस्तार, न्यायालयीन सेवाओं में सुधार तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की। सत्र में संगठन को जमीनी स्तर पर अधिक सशक्त बनाने तथा युवा अधिवक्ताओं को जोड़ने पर बल दिया गया।

तृतीय सत्र की मुख्य वक्ता उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता एवं प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता सुबोही खान रहीं। पर्यावरण आपातकाल विषय पर बोलते हुए उन्होंने जल, जमीन, जंगल एवं सम्पूर्ण पर्यावरण को संरक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अधिवक्ता समाज को पर्यावरणीय न्याय से जुड़े प्रकरणों में सक्रिय भूमिका निभानी होगी और जनता के साथ खड़ा होना होगा। उन्होंने उत्तराखण्ड की संवेदनशील पारिस्थितिकी को देखते हुए अधिवक्ताओं से विशेष सतर्कता और जागरूकता का आह्वान किया।

चतुर्थ सत्र में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कश्यप ने संघ की सौ वर्ष की यात्रा एवं राष्ट्रहित सर्वोपरि विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालकों के प्रेरक जीवन और उनके मार्गदर्शन पर प्रकाश डाला। डॉ. कश्यप ने कहा कि संघ आज सम्पूर्ण समाज को संगठित करने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने के संकल्प के साथ निरंतर अग्रसर है। उन्होंने अधिवक्ताओं से समाज में एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

|पंचम सत्र में फोरेंसिक विज्ञान विशेषज्ञ सत्य प्रकाश राय ने विधिक क्षेत्र में फोरेंसिक विज्ञान विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने अपराध अनुसंधान, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और अभियोजन में फोरेंसिक तकनीकों की बढ़ती उपयोगिता को रेखांकित किया। श्री राय ने कहा कि फोरेंसिक विज्ञान आधुनिक न्याय प्रणाली का अभिन्न अंग बन चुका है और यह त्वरित एवं त्रुटिरहित निर्णय में सहायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने अधिवक्ताओं को वैज्ञानिक साक्ष्यों की बारीकियों को समझने तथा न्यायालय में उनके प्रभावी उपयोग के लिए सुझाव दिए।

षष्ठम सत्र में अधिवेशन का विधिवत समापन हुआ। क्षेत्रीय संयोजक विपिन त्यागी ने सभी सत्रों के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह प्रथम प्रांत अधिवेशन संगठन के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। सत्र में सर्वसम्मति से संकल्प लिया गया कि अधिवक्ता परिषद उत्तराखण्ड की विधिक चुनौतियों के समाधान, त्वरित एवं सुलभ न्याय, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक समरसता के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाएगी। समापन पर आयोजन समिति के अध्यक्ष पीयूष तिवारी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। अधिवेशन का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।


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