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उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था का ऐतिहासिक बदलाव: एक जुलाई से खत्म होगा मदरसा बोर्ड, राज्य शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम से होगी पढ़ाई

editor
  • Awaaz Desk
  • June 30, 2026 12:06 PM
Historical change in the education system in Uttarakhand: Madrasa Board will be abolished from July 1, studies will be done as per the syllabus of the State Education Board

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लागू करते हुए राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है। कल एक जुलाई से प्रदेश में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण प्रभावी हो जाएगा, जिसके बाद राज्य के सभी मदरसे और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान इसी प्राधिकरण के अधीन संचालित होंगे। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से मदरसों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के साथ-साथ उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों को भी व्यापक मान्यता मिलेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसी वर्ष फरवरी में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की घोषणा की थी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि जुलाई 2026 से प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में लाया जाए और उन्हें उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्ध कराया जाए। अब सरकार ने इस निर्णय को लागू करते हुए शिक्षा व्यवस्था में एक नया अध्याय शुरू कर दिया है।

अब शिक्षा विभाग से मान्यता लेना होगी अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी मदरसों को विद्यालयी शिक्षा विभाग से औपचारिक मान्यता प्राप्त करनी होगी। साथ ही उन्हें उत्तराखंड राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम लागू करना होगा। इसके बाद मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकों के आधार पर शिक्षा दी जाएगी, जिससे वे आधुनिक और प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बन सकेंगे। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। अब तक मदरसा बोर्ड के तहत जारी कई प्रमाणपत्रों को सीमित मान्यता मिलने के कारण छात्रों को रोजगार और उच्च शिक्षा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

मिड-डे मील योजना के लिए भी लागू होगी नई व्यवस्था
राज्य सरकार ने इस बदलाव के साथ प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मील) को लेकर भी नई व्यवस्था लागू की है। अब केवल वही मदरसे और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे, जो विद्यालयी शिक्षा विभाग से संबद्ध होंगे। बिना मान्यता और संबद्धता वाले संस्थानों को इस सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और सरकारी योजनाओं का लाभ केवल निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों तक ही सीमित रहेगा।

सभी अल्पसंख्यक संस्थान आएंगे दायरे में
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल मुस्लिम समुदाय के मदरसों तक सीमित नहीं होगी। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अधीन अब सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान भी आएंगे। इससे प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए एक समान नियामक व्यवस्था लागू होगी।

प्रदेश में 452 पंजीकृत मदरसे, 45 हजार से अधिक छात्र
उत्तराखंड में वर्तमान समय में कुल 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। शैक्षिक सत्र 2023-24 में इन मदरसों में 45,808 छात्र अध्ययनरत थे। हालांकि 2024-25 के दौरान मुंशी, मौलवी और आलिम जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों में नामांकन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सरकार को उम्मीद है कि राज्य शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम और मान्यता मिलने के बाद मदरसों में नामांकन फिर से बढ़ेगा तथा विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य मिलेगा।


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