कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: नेपाल में फंसे कई भारतीय तीर्थयात्री, विदेश मंत्रालय ने जारी की सख्त एडवाइजरी
नई दिल्ली। निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए विदेश मंत्रालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त एडवाइजरी (परामर्श) जारी की है। पवित्र यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं से मंत्रालय ने अपील की है कि वे पूरी तरह सतर्कता बरतें और सभी आवश्यक कागजात हाथ में होने पर ही घर से निकलें। दरअसल, यह कदम तब उठाना पड़ा जब निजी ऑपरेटरों की लापरवाही के कारण कई भारतीय तीर्थयात्री नेपाल में फंस गए हैं और उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। शनिवार देर रात जारी अपने आधिकारिक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा, "मंत्रालय को पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई भारतीय नागरिकों से आपातकालीन सहायता के लिए अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जो निजी टूर ऑपरेटर के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। लेकिन चीन में प्रवेश के लिए आवश्यक वीजा और परमिट नहीं होने की वजह से वे वर्तमान में नेपाल में ही फंस गए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नागरिक तब तक भारत से अपनी यात्रा शुरू न करें, जब तक कि उन्हें पूरी यात्रा के लिए आवश्यक सभी यात्रा दस्तावेज (वीजा और परमिट) भौतिक रूप से प्राप्त न हो जाएं।
विदेश मंत्रालय ने एडवाइजरी में तीर्थयात्रियों को विशेष रूप से सचेत करते हुए कहा है कि वे किसी भी अनधिकृत एजेंट के झांसे में न आएं। यात्रा बुक करने से पहले यह अच्छी तरह से सत्यापित कर लें कि उनका टूर ऑपरेटर सरकारी नियमों के तहत विधिवत रजिस्टर्ड (पंजीकृत) और अधिकृत है या नहीं। ऑपरेटरों की प्रामाणिकता की जांच करना यात्रियों की सुरक्षा के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम है। गौरतलब है कि इसी वर्ष अप्रैल महीने में विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष जून से अगस्त तक आयोजित की जा रही है। भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के तहत यह यात्रा पिछले वर्ष करीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से बहाल हुई थी। इससे पूर्व, साल 2020 में कोरोना महामारी के कारण और बाद में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों के बीच उपजे सैन्य गतिरोध की वजह से इस यात्रा को सुरक्षा कारणों से सस्पेंड (स्थगित) कर दिया गया था। सरकार ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि आस्था के इस सफर को सुरक्षित और सुखद बनाने के लिए नियमों का पूरी तरह पालन करें, ताकि विदेशी धरती पर किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।