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कर्णप्रयाग विवाद की आंच पहुंची नगरासू गुरुद्वारे तकः छत पर चढ़े प्रदर्शनकारी, हालात संभालने में जुटी पुलिस और आईटीबीपी

editor
  • Awaaz Desk
  • June 21, 2026 05:06 AM
Karnaprayag dispute reaches Nagrasu Gurudwara: Protesters climb onto the roof; Police and ITBP work to bring the situation under control.

रुद्रप्रयाग। पिछले दिनों कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में शनिवार को तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना के बाद पुलिस और आईटीबीपी की टीमें लगातार मौके पर डटी हुई हैं तथा गुरुद्वारे में मौजूद निहंगों को बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं भी बाधित कर दी गई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार कर्णप्रयाग में हुई घटना को लेकर नाराज कुछ निहंग नगरासू स्थित गुरुद्वारे पहुंचे थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने गुरुद्वारे के सेवादार और एक बाबा के साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, एक व्यक्ति को कथित रूप से काफी देर तक बंधक बनाकर रखा गया और बाद में उसे छोड़ दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के बाद कुछ निहंग गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए। उनके हाथों में पत्थर होने की बात भी सामने आई है, जिससे आसपास के क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे में लगे कुछ सूचना पट्ट भी हटा दिए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया। हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और आईटीबीपी के जवानों को मौके पर तैनात किया गया। वरिष्ठ अधिकारी लगातार घटनास्थल की निगरानी कर रहे हैं और स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुरेश बलूनी ने बताया कि गुरुद्वारे के भीतर कुल आठ लोग मौजूद हैं, जिनमें सात निहंग शामिल हैं। पुलिस और आईटीबीपी के जवान लगातार उनसे बातचीत कर रहे हैं तथा उन्हें बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं। सूत्रों के अनुसार नगरासू में उत्पन्न तनाव की जड़ 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई एक विवादित घटना को माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ निहंग इस बात से नाराज थे कि कर्णप्रयाग में हुई घटना को लेकर स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से कोई औपचारिक आपत्ति या विरोध दर्ज नहीं कराया गया। इसी असंतोष के चलते उन्होंने नगरासू गुरुद्वारे में पहुंचकर अपना विरोध जताया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों का पक्ष सुना जाएगा।

इधर चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान सामने आए इस संवेदनशील प्रकरण पर उत्तराखंड सरकार ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। गृह सचिव शैलेश बगोली ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि मामले को सांप्रदायिक रंग देकर राज्य का माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह मामला दो पक्षों के बीच हुए विवाद और भावनात्मक आवेश से जुड़ा प्रतीत होता है। उत्तराखंड की पहचान सभी धर्मों और आस्थाओं के प्रति सम्मान, शांति और सौहार्द की रही है और राज्य सरकार किसी भी कीमत पर इस सामाजिक समरसता को प्रभावित नहीं होने देगी। गृह सचिव ने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप को निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही एडीजी लॉ एंड ऑर्डर से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी गई है। सरकार ने यात्रियों और श्रद्धालुओं की समस्याओं के समाधान के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था को और सशक्त बनाने का निर्णय लिया है। वर्तमान में संचालित चारधाम सेल को हेमकुंड साहिब यात्रा से भी जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रा अवधि के दौरान चौबीसों घंटे शिकायतों का निस्तारण किया जा सके। गृह सचिव ने नागरिकों और श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की शिकायत या विवाद की स्थिति में प्रशासन और पुलिस तंत्र का सहयोग लिया जाए। सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं फैलाने वाले तथा सामाजिक वैमनस्य पैदा करने की कोशिश करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 


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