उत्तराखंड:नेताजी सुभाषचंद्र बोस को कुमाऊं मंडल के सैनिकों पर था सबसे ज्यादा विश्वास,नारायण सिंह रौतेला थे आज़ाद हिंद फौज के ग्रुप लीडर,देश के खातिर नही की थी शादी, नैनीताल के ये जांबाज़ सिपाही भी थे आज़ाद हिंद फौज में शामिल
नेता जी सुभाष चन्द्र बोस और उनकी आजाद हिन्द फौज (आइएनए) का उत्तराखण्ड से गहरा नाता रहा है। हालांकि दावा तो यहां तक किया गया था कि नेताजी ने साधु वेश में 1977 तक अपना शेष जीवन उत्तराखंड में ही बिताया।सच्चाई जो भी हो मगर यह बात निर्विवाद सत्य है कि आजाद हिन्द फौज बनाने की प्रेरणा उन्हें उत्तराखंड की पवित्र भूमि पर ही मिली थी। आज़ाद हिंद फौज में ज़्यादातर कुमाऊं मंडल के कई सैनिक शामिल थे जिन्होंने वीरता और अदम्य साहस का परिचय दिया। इनमें अल्मोड़ा जिले बड़नाल रौतेला गांव निवासी नारायण सिंह रौतेला,नैनीताल के मल्लीताल निवासी मेजर केशव दत्त पांडे,पद्मश्री नैनीताल निवासी सुखदेव पांडे ,मल्लीताल क्षेत्र के सात नम्बर निवासी शिव सिंह थापा,अयार पाटा में हो रहे पीएसी के प्रसिद्ध बैंड मास्टर कैप्टन रामसिंह,शामिल थे।
इन जांबाजों में नारायण सिंह रौतेला ने देश को गुलामी की जंजीरों से आज़ादी दिलवाने के खातिर शादी भी नही की थी। घर बार छोड़कर नारायण आज़ाद हिंद फौज में शामिल हुए थे। उस ज़माने में उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की थी और आज़ाद हिंद फौज के ग्रुप लीडर रहे। आज़ाद हिंद फौज की किसी भी गतिविधियों का ज़िक्र नारायण किसी ने नही करते थे। नारायण सिंह के भतीजे आज भी हल्द्वानी जज फॉर्म में रहते है और नारायण सिंह के बारे में बताते है। सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिन पर नारायण सिंह के भतीजे कर्नल पूरन सिंह ने अमर उजाला को बताया कि जिस समय उनके चाचा शहीद हुए उस वक्त वो बहुत छोटे थे। अक्सर घर मे बाते हुआ करती थी तब उन्हें नारायण सिंह रौतेला यानी अपने चाचा के बारे में पता चलता था कि उनमें देशप्रेम कूट कूट कर भरा था। आज़ाद हिंद फौज में ग्रुप लीड करते हुए उन्होंने अपने साहस का परिचय दिया। सन 1957 के करीब नारायण सिंह रौतेला शहीद हो गए थे। उनकी स्मृतियां आज भी कुमाऊं में जिंदा है। नारायण सिंह के भतीजे नरेंद्र सिंह मेहरा बताते है कि नारायण सिंह रौतेला मेरी माँ के सबसे छोटे चाचा थे। जिस वक्त उनकी मृत्यु हुई वो भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आगमन की तैयारियों में लगे थे। उनके सबसे बड़े भाई गंगा सिंह रौतेला थे जो मेरे नाना थे,और वो सूबेदार थे। उनके दूसरे भाई गोविंद सिंह सेना में ब्रिगेडियर पद पर रिटायर्ड हुए थे। तीसरे भाई कुंदन सिंह रौतेला बैल पड़ाव में किसान थे। बड़ी बहन गोदावरी शाही नैनीताल के एडवोकेट गिरींश चन्द्र शाही की धर्मपत्नी थी। और समाजसेवी अरुण कुमार शाह और कर्नल सुशील कुमार उनके भांजे है।
नैनीताल निवासी इंटेलिजेंस ब्यूरो गृह मंत्रालय से रिटायर्ड सहायक संचालक अरुण कुमार शाह नारायण सिंह रौतेला के भांजे है अरुण कुमार शाह ने कहा कि अपने मामा पर मुझे गर्व है कि उन्होंने देश की आज़ादी में अपना योगदान दिया। आज देश मे ऐसे युवाओं की ही ज़रूरत है जो देश सेवा कर सकें।
आज़ाद हिंद फौज में कुमाऊं के धनपत सिंह बिष्ट,कालू सिंह,गोपाल सिंह,चंद्रशेखर खुल्बे,जेएस पांडे,कैप्टन राम दत्त,अमरीक सिंह पुनिया,डूंगर सिंह उम्मेद सिंह इत्यादि भी शामिल थे।