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अयोध्या की घटना से सबक: बदरी-केदार मंदिर समिति अलर्ट, चढ़ावे की निगरानी के लिए कड़े निर्देश

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 03, 2026 09:07 AM
Lesson from the Ayodhya incident: Badri-Kedar Temple Committee on alert; strict instructions issued to monitor temple offerings.

अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद, उत्तराखंड की प्रसिद्ध बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) पूरी तरह सतर्क और एक्शन मोड में आ गई है। चारधाम यात्रा के पीक सीजन के बीच, जब रोजाना हजारों श्रद्धालु बाबा केदार और भगवान बदरीविशाल के दरबार में शीश नवा रहे हैं, मंदिर समिति ने चढ़ावे और दान सामग्री की सुरक्षा व पारदर्शिता को लेकर अभूतपूर्व कदम उठाए हैं।

बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने मंदिर समिति के अधीन आने वाले सभी छोटे-बड़े मंदिरों, दान भेंट केंद्रों, गिनती स्थलों, लेखा खजाना, विश्रामगृहों और पूजा काउंटरों पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को सख्त लहजे में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सीईओ ने दोटूक कहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे के लेखा-जोखा में किसी भी प्रकार की लापरवाही, ढिलाई या अपारदर्शिता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल बेहद सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के दिशा-निर्देश पर मंदिर परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि अयोध्या राम मंदिर की घटना हमारे लिए एक गंभीर चेतावनी है। इसे देखते हुए बदरीनाथ व केदारनाथ सहित सभी अधीनस्थ मंदिरों में सतर्कता को कई गुना बढ़ा दिया गया है। अब दान और चढ़ावे की गिनती और उसकी सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक किया जा रहा है। गिनती स्थलों और खजाने के आसपास अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिससे हर एक गतिविधि पर 'तीसरी आंख' की चौबीसों घंटे पैनी नजर रहेगी। वर्तमान में चल रही चारधाम यात्रा में देश-विदेश से रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में बीकेटीसी का मानना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान की पवित्रता को बनाए रखना समिति की पहली प्राथमिकता है। नए निर्देशों के तहत, दान पेटियों को खोलने से लेकर रकम की गिनती और उसे खजाने में जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग और पुख्ता दस्तावेजीकरण (लेखा-जोखा) किया जाएगा। मंदिर समिति के इस त्वरित और कड़े फैसले से जहां व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, वहीं असामाजिक तत्वों पर भी लगाम कसी जा सकेगी।


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