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साथ जिएं, साथ मरे: सारण में तालाब में डूबने से आठवीं की दो सहेलियों की मौत; एक नहीं गई स्कूल तो दूसरी भी रुकी, अंतिम विदा भी साथ

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 02, 2026 07:07 AM
Lived together, died together: Two eighth-grade friends drowned in a pond in Saran; when one didn't go to school, the other stayed back too—and they shared their final farewell together.

छपरा। बिहार के सारण जिले के अमनौर थाना क्षेत्र से दोस्ती की एक ऐसी मर्मस्पर्शी और अत्यंत दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके की आंखों को नम कर दिया है। अमनौर कल्याण पंचायत के नरसिंहभानपुर गांव में बुधवार शाम एक स्थानीय तालाब में नहाने के दौरान आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली दो सहेलियों की डूबने से मौत हो गई। गांव में जिनकी अटूट दोस्ती की मिसालें दी जाती थीं, उन दोनों सहेलियों ने इस दुनिया से विदा भी एक साथ ही ली। इस भयावह हादसे के बाद से पूरे गांव के चूल्हे नहीं जले हैं और दोनों पीड़ित परिवारों में कोहराम मचा हुआ है।

मृतक छात्राओं की पहचान गांव के ही राजमिस्त्री दशरथ प्रसाद की पुत्री आंचल कुमारी (14 वर्ष) और दिनेश प्रसाद की पुत्री खुशबू कुमारी (14 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों नरसिंहभानपुर मध्य विद्यालय की आठवीं कक्षा की छात्राएं थीं। परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि दोनों बचपन की सहेलियां थीं और उनका हर काम साथ होता था। बुधवार को गांव के ही एक पड़ोसी के घर शादी समारोह था, जिसमें शामिल होने के लिए दोनों बच्चियों के माता-पिता मशरक गए हुए थे। माता-पिता के घर पर न होने के कारण आंचल ने उस दिन स्कूल न जाने का फैसला किया। जब खुशबू को पता चला कि आंचल स्कूल नहीं जा रही है, तो उसने भी अपना स्कूल बैग रख दिया। दोनों की दोस्ती का आलम यह था कि एक के बिना दूसरी स्कूल की दहलीज पर भी कदम नहीं रखती थी। बुधवार दोपहर घर से निकलने से पहले आंचल ने अपनी दादी से दुलार से 10 रुपये मांगे थे और कहा था कि वह दुकान से कुछ खाने की चीज खरीदकर अभी आती है। दुकान जाने के बहाने वह खुशबू से मिली। उसी समय आंचल की बड़ी बहन हंसा गांव के ऐतिहासिक शिव मंदिर के सामने स्थित तालाब में स्नान कर रही थी। आंचल और खुशबू भी खेल-खेल में वहां पहुंच गईं और तालाब के पानी में उतरकर नहाने लगीं। कुछ देर बाद बड़ी बहन हंसा पानी से बाहर निकल आई, लेकिन आंचल और खुशबू नहाते-नहाते किनारे से दूर गहरे पानी की तरफ चली गईं। अचानक पैर फिसलने से दोनों गहरे पानी में समाने लगीं और डूबते हुए एक-दूसरे को बचाने की जद्दोजहद करने लगीं। तालाब के बाहर खड़ी हंसा ने जब अपनी बहन और उसकी सहेली को डूबते देखा, तो उसके हाथ-पांव फूल गए। उसने समझदारी दिखाते हुए तुरंत पास पड़ी एक रस्सी उठाई और दोनों की तरफ फेंकी, ताकि वे उसे पकड़कर बाहर आ सकें। लेकिन अफसोस, रस्सी छोटी पड़ गई। हंसा ने बिना वक्त गंवाए दौड़कर गांव की तरफ रुख किया और चीख-पुकार मचाकर लोगों को इकट्ठा किया। उस समय तालाब में कुल छह लड़कियां थीं। चीख-पुकार सुनकर सबसे पहले स्थानीय वार्ड सदस्य रवि कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने कपड़ों की परवाह किए बिना सीधे उफनते तालाब में छलांग लगा दी। उनके पीछे-पीछे कई अन्य ग्रामीण भी पानी में उतरे। काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चियों को गहरे पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी; दोनों मासूमों की सांसें थम चुकी थीं। ग्रामीणों ने बताया कि जिस तालाब में यह हादसा हुआ, उसकी सफाई करीब दो महीने पहले शिव मंदिर में आयोजित एक बड़े यज्ञ के दौरान कराई गई थी। मानसून और बरसात की आमद से पहले ही उसमें पंपसेट के जरिए भारी मात्रा में पानी भरा गया था, जिससे तालाब पूरी तरह लबालब और गहरा था। हादसे के वक्त वहां कोई वयस्क मौजूद नहीं था। सूचना मिलते ही शादी के जश्न से लौट रहे दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अपनी बेटियों के बेजान शरीरों को देखकर माता-पिता दहाड़ें मारकर रो पड़े। आंचल तीन बहनों और दो भाइयों में मंझली थी, जबकि खुशबू दो बहनों और तीन भाइयों में से एक थी। घटना की खबर पाकर अमनौर थानाध्यक्ष हेमंत कुमार, बीडीओ राजीव कुमार सिन्हा और सीओ अजय कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने कागजी कार्रवाई पूरी कर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए छपरा सदर अस्पताल भेज दिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
 


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