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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा फैसलाः चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर! एफआईआर दर्ज कराने वाले कृष्ण मोहन को सौंपी गई कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी

editor
  • Awaaz Desk
  • July 06, 2026 01:07 PM
Major decision in the Ram Mandir donation theft case: Resignations of Champat Rai and Anil Mishra accepted! Krishna Mohan, who filed the FIR, has been entrusted with the responsibility of Acting General Secretary.

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। दोनों इस अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह घटना पूरे ट्रस्ट और करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि अनगिनत बलिदानों और लंबे संघर्ष के बाद बने इस भव्य मंदिर से जुड़ी ऐसी घटना बेहद शर्मनाक है और इससे सभी की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट की नियमित बैठक 11 जुलाई को प्रस्तावित थी, लेकिन परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए इसे पहले ही 6 जुलाई को बुलाया गया। बैठक में आवश्यक कोरम पूरा रहा और सभी सदस्यों ने विस्तृत चर्चा के बाद कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

कृष्ण मोहन को सौंपी गई अंतरिम जिम्मेदारी
बैठक में यह तय किया गया कि चंपत राय के इस्तीफे के बाद कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। वे अपनी टीम का गठन कर ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर को दान में प्राप्त लगभग 2,800 मूल्यवान वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को आयोजित होगी, जिसमें आगे की व्यवस्थाओं पर निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे का प्रस्ताव बैठक में रखा, जिसे सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। चंपत राय के करीबी लोगों का कहना है कि प्रभु श्रीराम की सेवा किसी पद की मोहताज नहीं होती और वे भविष्य में भी बिना किसी औपचारिक जिम्मेदारी के मंदिर एवं समाज की सेवा करते रहेंगे। बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, स्वामी गोविंद देव गिरी, स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ, कृष्ण मोहन सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

गोपाल राव को बैठक में प्रवेश नहीं मिला
बैठक के दौरान एक और घटनाक्रम चर्चा का विषय बना। ट्रस्ट की बैठक में शामिल होने पहुंचे गोपाल राव को यह कहते हुए प्रवेश नहीं दिया गया कि वे ट्रस्ट के अधिकृत ट्रस्टी नहीं हैं। इसके बाद उन्हें बैठक से बाहर कर दिया गया। ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि बैठक केवल अधिकृत सदस्यों के लिए थी। वहीं बैठक में मौजूद संतों और ट्रस्ट सदस्यों ने इस पूरे मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की। वासुदेवानन्द सरस्वती ने कहा कि चढ़ावे में अनियमितता और चोरी की खबरों ने संत समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। वहीं कृष्ण मोहन ने बैठक में जानकारी दी कि प्रारंभिक जांच के दौरान जैसे ही अनियमितताओं के संकेत मिले, तत्काल पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। स्वामी परमानंद गिरी ने कहा कि धर्म और आस्था की रक्षा करना ट्रस्ट का पहला दायित्व है। जब करोड़ों लोग अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिर में दान देते हैं, तब उस विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

एसआईटी रिपोर्ट पर विस्तार से हुई चर्चा
बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदेन सदस्य भी हैं। विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट उन्हें ही सौंपी थी। बैठक में एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा हुई। ट्रस्ट ने जांच की दिशा और निष्कर्षों पर संतोष व्यक्त किया तथा माना कि व्यवस्था में कुछ खामियां सामने आई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए व्यापक सुधार किए जाएंगे। सदस्यों ने कहा कि यह मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है और भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाएगी।


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