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सबौर कृषि विवि में महाघोटाला!: 350 अवैध नियुक्तियों के आरोप पर राजभवन सख्त,बक्सर सांसद से मांगे साक्ष्य 

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 18, 2026 09:06 AM
Major Scam at Sabour Agricultural University!: Raj Bhavan Takes a Stern View of Allegations Regarding 350 Illegal Appointments; Seeks Evidence from Buxar MP.

पटना। बिहार के उच्च शिक्षा जगत और प्रशासनिक महकमे से इस वक्त की बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर में हुए कथित बड़े नियुक्ति घोटाले और भारी वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने अब सीधे राजभवन का ध्यान खींच लिया है। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल सचिवालय पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राजभवन ने इस पूरे मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रारंभिक और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा जगत के रसूखदारों में हड़कंप मच गया है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार द्वारा इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। इस पत्र के जरिए मुख्य शिकायतकर्ता और बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह से लगाए गए आरोपों के समर्थन में सभी आवश्यक दस्तावेज, अकाट्य साक्ष्य और निर्धारित प्रारूप में शपथ-पत्र की मांग की गई है।

बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने राजभवन को सौंपी अपनी विस्तृत शिकायत में सबौर कृषि विश्वविद्यालय के भीतर चल रहे एक बहुत बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करने का दावा किया है। उनके आरोपों के मुताबिक, विश्वविद्यालय में विभिन्न महत्वपूर्ण और शीर्ष पदों पर बहाली के दौरान स्थापित नियमों, योग्यताओं और पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई गईं। इन पदों पर धांधली का आरोप: प्रशासनिक पदाधिकारी, सहायक कुलसचिव , विषय-वस्तु विशेषज्ञ, सहायक प्राध्यापक और निदेशक समेत करीब 350 से अधिक पदों पर नियुक्तियों में भारी हेरफेर की गई है। पक्षपात की पराकाष्ठा: सांसद का आरोप है कि योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर बैकडोर से चहेतों को उपकृत किया गया और पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में पक्षपात किया गया। सांसद सुधाकर सिंह ने अपनी शिकायत में देश की सर्वोच्च जांच संस्था 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' की रिपोर्ट का भी विशेष रूप से उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कैग की ऑडिट रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के भीतर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों और प्रशासनिक चूक के तथ्य पहले ही उजागर हो चुके थे। इसके बावजूद, विश्वविद्यालय प्रबंधन और संबंधित महकमे ने भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए इन गंभीर आपत्तियों पर कोई अपेक्षित या ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। इसी ढुलमुल रवैए के बाद उन्हें राजभवन से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगानी पड़ी। राजभवन की ओर से जारी पत्र में बिहार सरकार के प्रचलित और कड़े नियमों का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता सांसद को 15 दिनों के भीतर अपने आरोपों के समर्थन में सभी लिखित साक्ष्य और औपचारिक आश्वासन प्रस्तुत करने को कहा गया है। राजभवन ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि प्राप्त साक्ष्यों के कानूनी और तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही इस मामले को अगले चरण की उच्चस्तरीय जांच समिति के सुपुर्द किया जाएगा। अब सबकी निगाहें सांसद सुधाकर सिंह द्वारा राजभवन को सौंपे जाने वाले दस्तावेजों और उसके बाद राज्यपाल द्वारा उठाए जाने वाले कड़े कदमों पर टिक गई हैं। इस कार्रवाई से तय होगा कि सबौर कृषि विवि के इस कथित सिंडिकेट का सच कब तक सामने आता है।


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