बिहार की पंचायतों को ₹51,923 करोड़ का बंपर अनुदान: नीतीश-सम्राट कैबिनेट का बड़ा फैसला,स्टेट हाईवे पर लगेगा टोल टैक्स
पटना। बिहार में ग्रामीण और शहरी विकास को एक नई और अभूतपूर्व रफ्तार देने के लिए सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री) और नीतीश सरकार की कैबिनेट ने फैसलों का बड़ा पिटारा खोल दिया है। सरकार ने राज्य की पंचायती राज संस्थाओं को अब तक की सबसे बड़ी सौगात देते हुए 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए कुल 51,923 करोड़ रुपये के भारी-भरकम अनुदान को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार से मिलने वाली यह राशि पिछली बार के 21,000 करोड़ रुपये के मुकाबले दोगुनी से भी कहीं अधिक है। इसके अलावा, कैबिनेट ने राज्य के विकास के लिए राजस्व जुटाने के उद्देश्य से स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स लगाने और नगर निगम का पहला बॉन्ड जारी करने समेत कुल 29 महत्वपूर्ण एजेंडों पर अपनी मुहर लगाई है।
कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह विशाल धनराशि अगले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान चरणबद्ध तरीके से केंद्र से प्राप्त होगी। सरकार ने इसके पारदर्शी वितरण और उपयोग की पूरी रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) तैयार कर ली है। इस अनुदान का मुख्य हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी (आधारभूत) संरचना के विकास, पक्की सड़कों के निर्माण और नालियों के सुदृढ़ीकरण पर खर्च होगा। गांवों में स्वच्छता अभियान को मजबूत करने, हर घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और सामुदायिक संपत्तियों के रखरखाव को इससे नई मजबूती मिलेगी। बेहतर कार्य निष्पादन करने वाली और समय पर योजनाओं को पूरा करने वाली पंचायतों को सरकार की तरफ से अतिरिक्त 'निष्पादन अनुदान' (परफॉर्मेंस ग्रांट) भी दिया जाएगा। कैबिनेट ने राज्य के वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने के लिए एक और बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए बिहार के 3,617 किलोमीटर लंबे स्टेट हाईवे (SH) पर टोल टैक्स लगाने की मंजूरी दी है। अब इन सड़कों से गुजरने वाले वाहनों को प्रति किलोमीटर के हिसाब से जेब ढीली करनी होगी। तय की गई दरें इस प्रकार हैं। शहरी विकास के मोर्चे पर बिहार में एक ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है। नगर विकास विभाग के तहत पहली बार नगर निगम की ओर से 200 करोड़ रुपये का म्युनिसिपल बॉन्ड जारी किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि देश के दूसरे विकसित राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन बिहार में इसका प्रयोग पहली बार हो रहा है। इस बॉन्ड के जरिए बाजार से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल बड़े शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में किया जाएगा, जिससे शहरों का कायाकल्प होगा। कैबिनेट ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए दो बड़े फैसले लिए हैं। राज्य में पांच नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) खोलने के लिए सरकार ने 5-5 एकड़ की बेशकीमती जमीन मुफ्त में देने की स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही, विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर प्रोफेसरों की बहाली को लेकर भी एक महत्वपूर्ण और त्वरित निर्णय लिया गया है। राजनीतिक और आर्थिक जानकारों का मानना है कि पंचायतों को भारी वित्तीय स्वायत्तता, स्टेट हाईवे पर टोल से राजस्व जुटाना और म्युनिसिपल बॉन्ड जैसी आधुनिक वित्तीय नीतियां बिहार को आत्मनिर्भर बनाने और इसके समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होंगी।