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मनरेगा खत्म,बिहार में 1 जुलाई से लागू होगी 'वीबीजीरामजी' योजना; अब 100 नहीं, मिलेगा 125 दिनों का गारंटीड रोजगार

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 30, 2026 10:06 AM
MGNREGA to end; 'VBG Ramji' scheme to be implemented in Bihar from July 1; guaranteed employment of 125 days instead of 100.

पटना। बिहार के ग्रामीण इलाकों में आजीविका और विकास के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। आगामी 1 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह अब 'विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण योजना' (वीबीजीरामजी) पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी। इस महात्वाकांक्षी योजना के तहत अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का गारंटीड रोजगार मिलेगा। बिहार सरकार ने इसे अमलीजामा पहनाने के लिए कमर कस ली है।

योजना को पारदर्शिता और तेजी से लागू करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 'बिहार राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद' का गठन किया गया है। यह परिषद सीधे सीएम स्तर से योजना की निगरानी करेगी। हाई-प्रोफाइल कमेटी: परिषद में ग्रामीण विकास, वित्त, पंचायती राज, शिक्षा, पर्यावरण, जल संसाधन, कृषि और श्रम सहित एक दर्जन से अधिक विभागों के मंत्रियों को सदस्य बनाया गया है। मुख्य सचिव और विकास आयुक्त इसके पदेन सदस्य होंगे। महिलाओं को विशेष भागीदारी: परिषद में पंचायती राज संस्थाओं और कमजोर वर्गों से अधिकतम 15 गैर-सरकारी सदस्य शामिल होंगे, जिनमें एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं।  इसके अलावा, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक 17 सदस्यीय राज्य स्तरीय संचालन समिति भी बनाई गई है। जिला स्तर पर डीएम (जिला कार्यक्रम समन्वयक) और प्रखंड स्तर पर बीडीओ (कार्यक्रम पदाधिकारी) को कमान सौंपी गई है। दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय सम्मेलन में बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने देश भर में 'एक समान मजदूरी' लागू करने की पुरज़ोर मांग उठाई है ताकि श्रमिकों को समान लाभ मिल सके। नई योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक या अधिकतम 15 दिनों के भीतर बैंक खातों में कर दिया जाएगा। यदि भुगतान में देरी होती है, तो मजदूरों को ब्याज सहित पैसा मिलेगा।

हालाँकि, इस नई व्यवस्था से बिहार सरकार पर भारी वित्तीय बोझ पड़ने वाला है। पहले राज्य सरकार को कुल व्यय का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा देना पड़ता था, लेकिन अब 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को खुद वहन करना होगा। इसके बावजूद, सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने के लिए इस अतिरिक्त वित्तीय भार को स्वीकार किया है। 'विकसित भारत 2047' के विजन को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक ग्राम पंचायत अपनी योजना खुद तैयार करेगी। इस बार सबसे ज्यादा ध्यान कृषि क्षेत्र पर केंद्रित किया गया है। योजना का खाका इस तरह तैयार किया जा रहा है कि खेती के मुख्य सीजन के दौरान किसानों को मजदूरों की किल्लत का सामना न करना पड़े, जिससे कृषि उत्पादकता भी बढ़ेगी और मजदूरों को भी काम मिलेगा। काम में तेजी लाने और लालफीताशाही को खत्म करने के लिए सरकार ने प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी के अधिकारों का विकेंद्रीकरण कर दिया है। योजना के नियम बेहद सरल रखे गए हैं। किसी भी रजिस्टर्ड ग्रामीण परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य (महिला या पुरुष), जिसका नाम 'रोजगार गारंटी कार्ड' में दर्ज है, वह अकुशल शारीरिक श्रम के लिए सीधे आवेदन कर सकता है। सरकार का दावा है कि समयबद्ध तरीके से मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित कर ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को रोका जाएगा और स्थानीय बाजार को एक नई गति मिलेगी।


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