जम्मू-कश्मीर में मानसून बना आफतः डोडा के भलेसा में बादल फटने से भारी तबाही! खेतों में घुसा मलबा, मकानों को नुकसान
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में मानसून ने भीषण तबाही मचाई है। जिले के भलेसा क्षेत्र में बादल फटने और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। अचानक आई बाढ़ ने कृषि भूमि, बाग-बगीचों और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है, जबकि प्रमुख सड़कें बंद होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, डोडा जिले के भलेसा के खलजुगासर इलाके में बादल फटने की घटना के बाद अचानक तेज बहाव के साथ पानी और मलबा नीचे की ओर आया। देखते ही देखते खेत जलमग्न हो गए और कई स्थानों पर कृषि भूमि मलबे में तब्दील हो गई। किसानों की तैयार खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं, जबकि सेब और अन्य फलदार बाग-बगीचों को भी भारी क्षति पहुंची है। इससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्राकृतिक आपदा के कारण कई मकानों और अन्य निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है। कई घरों में पानी और मलबा घुसने से लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली हैए लेकिन संपत्ति और कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान को काफी बड़ा बताया जा रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण जिले की कई महत्वपूर्ण सड़कें भी बंद हो गईं। भूस्खलन और मलबा आने से भलेसा का भट्यास क्षेत्र घंटों तक शेष जिलों से कटा रहा। सड़क संपर्क टूटने के कारण लोगों को आवश्यक वस्तुओं और चिकित्सा सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर वाहन बीच रास्ते में फंस गए और यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। उधर, डोडा जिले के कश्तीगढ़ क्षेत्र में भी मूसलाधार बारिश के चलते अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। तेज बहाव के कारण स्थानीय नाले उफान पर आ गए और आसपास के निचले इलाकों में पानी भर गया। हालांकि प्रशासन के अनुसार कश्तीगढ़ क्षेत्र से किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों से विस्तृत रिपोर्ट मंगाई गई है। बादल फटने की घटना के बाद क्षेत्र के कई प्राकृतिक जल स्रोत और नाले उफान पर आ गए, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और मिट्टी के कटाव की समस्या उत्पन्न हो गई। कई स्थानों पर कृषि भूमि बह गई, जबकि ग्रामीण संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए। इससे ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हो गई। इधर मौसम विभाग ने भी जम्मू-कश्मीर के कई पर्वतीय क्षेत्रों में आगामी दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है।