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पहाड़ की बेटी ने थामी परिवार की पतवार: पिता की मृत्यु के बाद सानिया बनीं टैक्सी ड्राइवर,रूढ़ियों को दे रही हैं चुनौती

editor
  • Tapas Vishwas
  • March 08, 2026 12:03 PM
Mountain girl takes charge of family: After her father's death, Sania becomes a taxi driver, challenging stereotypes.

पौड़ी। हौसले बुलंद हों और इरादे नेक, तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से एक ऐसी ही प्रेरक कहानी सामने आई है, जिसने समाज के बने-बनाए मिथकों को तोड़ दिया है। चौबट्टाखाल तहसील के गिंवली गांव की सानिया राणा आज उन दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर कुशलता से टैक्सी दौड़ा रही हैं, जहाँ कभी उनके पिता गाड़ी चलाया करते थे। सानिया के पिता कमलेश सिंह राणा स्वयं एक टैक्सी चालक थे। उनकी दिली इच्छा थी कि उनकी बेटी भी बेटे की तरह आत्मनिर्भर बने और ड्राइविंग सीखे। पिता के प्रोत्साहन पर सानिया ने न केवल कार चलाना सीखा, बल्कि 18 वर्ष की होते ही अपना व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा लिया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इसी वर्ष 13 जनवरी को परिवार को कमलेश सिंह की गंभीर बीमारी का पता चला और महज कुछ ही दिनों बाद, 2 फरवरी को उनका निधन हो गया। पिता के साये के बिना परिवार गहरे आर्थिक संकट में घिर गया।

शोक की घड़ी में भी सानिया ने हिम्मत नहीं हारी। पिता की तेरहवीं के संस्कार पूरे होते ही सानिया ने घर की आर्थिकी को संभालने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने पिता की टैक्सी का स्टेयरिंग थामा और निकल पड़ीं सर्पिलाकार सड़कों पर। आज सानिया सतपुली, नौगांवखाल और चौबट्टाखाल जैसे क्षेत्रों में नियमित रूप से सवारी ढोती हैं। इतना ही नहीं, वे यात्रियों को लेकर कोटद्वार और देहरादून तक के लंबे सफर भी बेहिचक तय करती हैं। राजकीय महाविद्यालय चौबट्टाखाल से स्नातक (Graduation) कर रही सानिया अपनी पढ़ाई और पेशे के बीच बेहतरीन संतुलन बना रही हैं। सानिया के पिता ने गाड़ी के लिए बैंक और निजी कंपनी से ऋण लिया था। आज सानिया टैक्सी चलाकर न केवल अपने घर का खर्च चला रही हैं, बल्कि उस कर्ज की किस्तें भी समय पर चुका रही हैं। घर में अपनी माँ, भाई-भाभी और बड़ी बहन के साथ रहने वाली सानिया आज अपने भाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर परिवार की आजीविका चला रही हैं। सानिया बताती हैं कि एक बार उन्होंने पिता से शहर जाकर कंप्यूटर सीखने की इच्छा जताई थी, तब पिता ने उन्हें समझाया था कि जब रोजगार घर पर ही मौजूद है, तो बाहर भटकने की क्या जरूरत? पिता की इसी सलाह को सानिया ने अपना जीवन मंत्र बना लिया। आज वे उत्तराखंड की उन चुनिंदा महिला टैक्सी ड्राइवरों में शामिल हैं, जो यह संदेश दे रही हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता और बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
 


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