नैनीताल चुनावी सरगर्मी: बीजेपी के लिए खुद को नंबर वन बताने वाले हेम आर्य का छलका दर्द,टिकट न मिलने पर फेसबुक पर की इमोशनल पोस्ट,गोल्ज्यू देवता लगाई ये गुहार
इनदिनों नैनीताल विधानसभा सीट बेहद रोचक बन गयी है। एक ओर बरसों कांग्रेस की चाशनी के चटकारे लेकर सरिता आर्य बीजेपी में शामिल हुई और तीन दिन के भीतर ही उन पर बीजेपी ने इतना एतबार कर लिया कि सरिता आर्य को टिकट तक दे डाला। वहीं दूसरी ओर टिकट के इंतज़ार में महीनों से तैयारी कर रहे बीजेपी के प्रबल दावेदार हेम आर्य ,दिनेश आर्य, और मोहन पाल ये तमाशा खड़े खड़े देखते रह गए कि आखिर ये अचानक हुआ क्या? दिनेश आर्य बीजेपी से नाराज़ होकर अब निर्दलीय चुनाव लड़ने जा रहे है। हेम आर्य के साथ अन्याय कहे या किस्मत का खेल?हेम आर्य ने अपनी बीजेपी के प्रति अपनी नाराज़गी अपने फेसबुक पेज पर व्यक्त की है।

जब हेम आर्य बीजेपी में थे,तब कांग्रेस से अचानक संजीव आर्य बीजेपी में आगये और टिकट लेकर जीत भी गए,साल 2017 में ये पलटफेर हुआ था। अब जब संजीव आर्य ने कांग्रेस में घर वापसी कर ली तो टिकट के प्रबल दावेदार भी वही है इसीलिए हेम आर्य ने अब बीजेपी में घर वापसी कर ली और विधायक बनने के सपने देखते हुए गांव गांव जाकर जी तोड़ मेहनत भी की,लेकिन अब की बार फिर वही हुआ,सरिता आर्य तीन दिन पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आई और टिकट पर झपट्टा मार लिया। हालांकि सरिता आर्य को टिकट मिलने से पहले हेम आर्या ने कहा था कि "वो कांग्रेस में भी नम्बर वन दावेदार थे और बीजेपी में भी नंम्बर 1 हैं, उन्होंने ये भी कहा था कि उन्होंने पार्टी के लिये काम किया है और कोरोना में लोगों को राशन और सेनेटाइजर बांटा, जिसके चलते क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है। हेम ने कहा कि जनता का समर्थन उनके साथ है और जो लोग हल्द्वानी से नैनीताल चुनाव लड़ने आ रहे हैं उनको टिकट न दिया जाए। वही सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक
हेम आर्य को इस बार बीजेपी ज्वाइन करते समय ही बता दिया गया था कि उन्हें टिकट नहीं दिया जा रहा है बल्कि सिर्फ पार्टी के एक कार्यकर्ता के तौर पर बीजेपी से जुड़े हैं। पार्टी का एक फोरम में और केन्द्रीय नेता तय करते हैं कि कौन चुनाव लड़ेगा और जो लोग खुद को दावेदार कह रहे हैं वो अभी पार्टी में जुड़े हैं।