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दरभंगा के 150 साल पुराने जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पर प्रकृति का कहर: आकाशीय बिजली गिरने से गुंबद को पहुंचा नुकसान, सुरक्षित रहे सभी भक्त

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 29, 2026 12:06 PM
Nature's fury strikes Darbhanga's 150-year-old Jaleshwarnath Mahadev Temple: Lightning strike damages the dome; all devotees remain safe.

दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और चमत्कारिक खबर सामने आई है। हायाघाट प्रखंड अंतर्गत होरलपट्टी गांव में स्थित सदियों प्राचीन एवं ऐतिहासिक बाबा जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर के गुंबद पर रविवार की देर रात अचानक आकाशीय बिजली (ठनका) गिर गई। आकाशीय बिजली का झटका इतना जोरदार था कि मंदिर का ऊपरी गुंबद क्षतिग्रस्त हो गया और पूरे इलाके में तेज धमाके के साथ अफरा-तफरी मच गई। राहत और चमत्कार की बात यह रही कि घटना के वक्त मंदिर परिसर के भीतर करीब 25 श्रद्धालु मौजूद थे, जो बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में लीन थे। भगवान की असीम अनुकंपा से किसी भी श्रद्धालु को खरोंच तक नहीं आई और एक बहुत बड़ा हादसा होते-होते टल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, रविवार रात क्षेत्र में मौसम का मिजाज बेहद खराब था। तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश हो रही थी और बादल गरज रहे थे। इसी बीच अचानक आसमान से चमचमाती हुई बिजली सीधे मंदिर के मुख्य गुंबद पर आ गिरी। धमाका इतना तेज था कि आसपास के घरों के लोग दहल गए। घटना की सूचना मिलते ही भारी संख्या में ग्रामीणों और स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में जमा हो गई। गुंबद के क्षतिग्रस्त हिस्सों को देखकर हर कोई हैरान था, लेकिन सभी भक्तों के सुरक्षित होने पर लोगों ने बाबा जलेश्वरनाथ का आभार प्रकट किया। हायाघाट प्रखंड की मझौलिया पंचायत में स्थित जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर और होरलपट्टी का प्रसिद्ध 'गंगासागर तालाब' धार्मिक के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस स्थान का इतिहास दरभंगा राज से जुड़ा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस भव्य और ऐतिहासिक तालाब का निर्माण दरभंगा राज के महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह की धर्मपत्नी महारानी लक्ष्मेश्वरी ने करवाया था। क्षेत्र में यह जनश्रुति बेहद प्रसिद्ध है कि महारानी ने तालाब की एक विशेष मछली को सोने की नथुनी पहनाई थी, जिसके बाद से यह तालाब और मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र बन गए। करीब 150 वर्षों से इस तालाब की मछलियों को बेहद पवित्र माना जाता है और यहाँ मछली पकड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। कुछ समय पूर्व यहाँ एक क्विंटल से अधिक वजनी मृत मछली मिलने पर भी खूब चर्चा हुई थी। बाबा जलेश्वरनाथ मंदिर के प्रति लोगों का अटूट विश्वास है। यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पहले पवित्र गंगासागर तालाब में स्नान करते हैं और फिर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। सावन और विशेष त्योहारों पर यहाँ बिहार के कोने-कोने के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी हजारों की तादाद में भक्त पहुँचते हैं। इस घटना के बाद स्थानीय प्रबुद्धजनों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मंदिर के क्षतिग्रस्त गुंबद की तुरंत वैज्ञानिक पद्धति से मरम्मत कराने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर परिसर में तड़ित चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) व अन्य सुरक्षा उपकरण लगाने की पुरजोर मांग की है।
 


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