• Home
  • News
  • NEET controversy turns into a nationwide agitation: BJP and Congress workers clash in Patna! Protests erupt on the streets of Bhopal, Lucknow, Mumbai, and Ahmedabad.

NEET विवाद ने पकड़ा देशव्यापी आंदोलन का रूपः पटना में BJP-कांग्रेस कार्यकर्ता भिड़े! भोपाल, लखनऊ, मुंबई और अहमदाबाद तक सड़कों पर प्रदर्शन

editor
  • Awaaz Desk
  • July 22, 2026 11:07 AM
NEET controversy turns into a nationwide agitation: BJP and Congress workers clash in Patna! Protests erupt on the streets of Bhopal, Lucknow, Mumbai, and Ahmedabad.

नई दिल्ली। देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और NEET परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब धीरे-धीरे देशव्यापी स्वरूप लेता जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब कई राज्यों और बड़े शहरों तक पहुंच चुका है। छात्रों के साथ अभिभावक, शिक्षक, सामाजिक संगठन और अब कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल भी इस आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। आंदोलन के विस्तार के साथ ही राजनीतिक टकराव भी बढ़ता जा रहा है। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव, कथित लाठीचार्ज और राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की हिरासत के बाद देश का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। बुधवार को एक ओर जहां दिल्ली में विपक्षी दलों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर देश के कई शहरों में छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। राजधानी दिल्ली के मकर द्वार के बाहर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई सांसद काले कपड़े पहने नजर आए और उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, छात्रों के मुद्दों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर आंदोलन की शुरुआत दिल्ली के जंतर-मंतर से हुई थी। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन छात्रों और अभिभावकों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों के जुड़ने से बड़ा होता गया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो तथा परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता की स्थिति में छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जाए। बीते दिनों आंदोलनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। इसके बाद कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए, जबकि पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई। प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। वहीं, सरकार की ओर से विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया गया।

राहुल गांधी की हिरासत के बाद और गरमाया सियासी माहौल
छात्र आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी सामने आए। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के मुद्दों को दबाने की कोशिश कर रही है और विपक्षी नेताओं को भी अपनी बात रखने से रोका जा रहा है। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठाना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार को छात्रों की समस्याओं पर संवाद करना चाहिए, न कि उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास करना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा गया कि छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों पर उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है और विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहा है।

संसद के मानसून सत्र में भी गूंजा NEET विवाद
छात्र आंदोलन की गूंज संसद के मानसून सत्र में भी सुनाई दी। विपक्षी सांसदों ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। विपक्ष ने सरकार से छात्रों की समस्याओं पर सदन में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। बुधवार को कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद संसद परिसर में एकजुट हुए। मकर द्वार के बाहर हुए प्रदर्शन में कई सांसद काले कपड़े पहने नजर आए। विपक्षी नेताओं ने सरकार से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों के सवालों का जवाब देने की मांग की। वहीं, सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के चलते संसद की कार्यवाही पर भी इसका असर देखने को मिला।

दिल्ली के बाहर भी तेज हुआ विरोध प्रदर्शन, पटना में पथराव से मचा हड़कंप
दिल्ली में चल रहे आंदोलन का असर अब देश के अन्य हिस्सों में भी दिखाई देने लगा है। बुधवार को पटना, भोपाल, लखनऊ, मुंबई, अहमदाबाद समेत कई शहरों में छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों के अधिकार और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। गुजरात के अहमदाबाद में भी प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि करीब 150 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि जब तक छात्रों से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन जारी रहने की बात कही गई है। इधर NEET विवाद और छात्र आंदोलन की राजनीतिक गूंज बिहार की राजधानी पटना में भी देखने को मिली। यहां प्रदर्शन के दौरान बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने के बाद झड़प की स्थिति बन गई और पथराव की घटना सामने आई। बताया गया कि बीजेपी कार्यकर्ता कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के खिलाफ अपना प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और स्थिति झड़प तक पहुंच गई। इस दौरान दोनों ओर से पत्थरबाजी की जानकारी सामने आई, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मौके पर सुरक्षा बल तैनात किया गया और दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को अलग करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। पटना की घटना ने यह साफ कर दिया है कि छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा अब केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका असर सीधे राजनीतिक गलियारों तक पहुंच चुका है।


संबंधित आलेख: