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उत्तराखण्ड में NEET UG फर्जी प्रमाणपत्र नेटवर्क का खुलासा! मेडिकल दाखिले के लिए फर्जी दस्तावेजों का खेल, दो गिरफ्तार

editor
  • Awaaz Desk
  • September 22, 2026 11:09 AM
NEET UG fake certificate network busted in Uttarakhand! Scheme involving forged documents for medical admissions; two arrested.

देहरादून। उत्तराखंड में NEET UG के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल के मामले में SIT ने पहली बड़ी गिरफ्तारियां की हैं। देहरादून पुलिस के मुताबिक, मामले में कथित गिरोह के मास्टरमाइंड रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया गया है। दोनों से पूछताछ के बाद जांच टीम अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पुलिस की जांच का दायरा देहरादून से आगे हरिद्वार तक पहुंच चुका है। इससे पहले SIT अलग-अलग सरकारी कार्यालयों और रिकॉर्ड की जांच कर फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया को खंगाल रही थी। बताया गया है कि मंगलवार को 10 सदस्यीय SIT टीम मामले से जुड़े दस्तावेजों और संदिग्धों की पड़ताल के लिए हरिद्वार पहुंची। वहीं, दो आरोपियों को पूछताछ के लिए देहरादून के रायपुर थाने बुलाया गया था। पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की ओर से बताया गया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने और उनके जरिए मेडिकल दाखिले में लाभ लेने से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। SIT की जांच के मुताबिक, फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने के लिए कथित तौर पर 45 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। पुलिस के अनुसार तीन लोगों ने एडवांस के तौर पर करीब 20 लाख रुपये दिए थे। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ, प्रमाणपत्र किस स्तर पर तैयार किए गए और इनके इस्तेमाल से किन-किन अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी अरविंद कुमार ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि उसने अपनी बेटी के लिए फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने के एवज में 20 लाख रुपये दिए थे। अरविंद की बेटी के खिलाफ भी रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज है। SIT अब आरोपी के बयान और दस्तावेजों की जांच कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है। पुलिस ने रूपेश पंडित को इस पूरे फर्जीवाड़े का कथित मास्टरमाइंड बताया है। देहरादून SSP प्रमेंद्र डोबाल के मुताबिक, रूपेश मेरठ में मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले एक संस्थान का संचालक है। पुलिस का आरोप है कि उसके जरिए फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर उनका इस्तेमाल भारत सहित अन्य स्थानों पर किया गया। हालांकि, इन आरोपों की पूरी तस्वीर SIT की विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा प्रमाणपत्रों को सरकारी रिकॉर्ड और काउंसलिंग प्रक्रिया तक कैसे पहुंचाया गया।

12 संदिग्ध पुलिस के रडार पर
SIT के मुताबिक, मामले में अभी करीब 12 अन्य लोग संदिग्ध हैं और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल जांच टीम कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों, दस्तावेजों और पैसों के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा ई-डिस्ट्रिक्ट सेंटर और CSC सेंटर से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। SIT यह जानने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी प्रमाणपत्रों को तैयार कराने और सत्यापन की प्रक्रिया में किसी व्यक्ति या संस्थान की भूमिका थी या नहीं।

कैसे सामने आया MBBS दाखिला फर्जीवाड़ा?
मामला NEET-UG काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और अन्य आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों के जरिए राज्य कोटे की आरक्षित MBBS और BDS सीटों पर दाखिला हासिल किया। SIT की शुरुआती जांच में कुछ ऐसे मामलों की पड़ताल की गई, जिनमें एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम से कथित तौर पर अलग-अलग अभ्यर्थियों ने खुद को उनका पोता या आश्रित बताया। पुलिस ने संबंधित परिवारों से संपर्क कर उनके बयान भी दर्ज किए हैं। जांच में कुछ अभ्यर्थियों द्वारा इस्तेमाल किए गए पते भी कथित तौर पर संदिग्ध पाए गए हैं। मामले की जांच में कथित फर्जी प्रमाणपत्रों पर AI से तैयार तस्वीरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ दस्तावेजों में दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी की कथित तौर पर AI-generated तस्वीर इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। SIT अब दस्तावेजों की तकनीकी और रिकॉर्ड आधारित जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि प्रमाणपत्र वास्तव में कहां और किस प्रक्रिया से तैयार किए गए। मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं रखा गया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार करीब 350 से अधिक अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच के दायरे में हैं। इनमें डोमिसाइल और अन्य आरक्षित श्रेणियों से जुड़े प्रमाणपत्र भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने आरक्षित श्रेणियों से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सरकारी कार्रवाई के तहत कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र और दाखिले निरस्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार अब सभी संबंधित आरक्षित श्रेणियों के दस्तावेजों की दोबारा जांच पर जोर दिया जा रहा है।


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