ऊधम सिंह नगर में तीन महीने तक नहीं होगा खनन: मानसून के खतरे को देखते हुए डीएम का बड़ा आदेश, अधिकांश खनन पट्टों पर रोक, नियम तोड़ने वालों पर चलेगा कानूनी शिकंजा
ऊधमसिंहनगर। मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं और जन सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने ऊधम सिंह नगर में खनन गतिविधियों पर बड़ा निर्णय लिया है। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने आदेश जारी करते हुए जिले में संचालित अधिकांश खनन पट्टों पर 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक खनन और उपखनिज चुगान कार्य बंद रखने के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार इस अवधि में यदि कोई व्यक्ति अवैध खनन करते हुए पाया जाता है तो उसके विरुद्ध उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली-2023 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि बरसात के मौसम में नदियों और खनन क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण खनन कार्य जारी रहने से जान-माल की हानि की आशंका बनी रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से यह प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन खनन पट्टाधारकों को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्राधिकरण से निर्धारित शर्तों के साथ अनुमति प्राप्त है, उनके लिए भी मानसून अवधि में निर्धारित शर्तों के अनुरूप जून माह के अंत तक ही खनन कार्य करने का प्रावधान था। इसके बाद मानसून अवधि में खनन गतिविधियों को रोकना अनिवार्य माना गया है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय सरकार द्वारा संचालित तथा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में संचालित गौला नदी पुनर्जीवन (री-जुवेनेशन) योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्य इस प्रतिबंध से अलग रहेंगे। इसके अतिरिक्त जिले के सभी अन्य खनन क्षेत्रों में तीन माह तक खनन और उपखनिज चुगान पूरी तरह बंद रहेगा। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों, पुलिस प्रशासन, उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों और खनन विभाग को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी खनन पट्टाधारकों को भी आदेश का अनुपालन करने के लिए निर्देशित किया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान यदि कोई व्यक्ति या संस्था अवैध रूप से खनन अथवा उपखनिज चुगान करते हुए पकड़ी जाती है तो उसके खिलाफ उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली-2023 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों को नियमित निगरानी, संयुक्त अभियान और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।