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पितृपक्षः पितरों की आत्मा की शांति के लिए इन जगहों पर करें पिंडदान! परिवार में बनेगी सुख-शांति, लिंक में पढ़ें क्या है महत्व

editor
  • Awaaz Desk
  • September 29, 2023 10:09 AM
Pitru Paksha: Offer Pinda Daan at these places for the peace of the souls of ancestors! There will be happiness and peace in the family, read its importance in the link

आज 29 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरूआत हो गई है जो 14 अक्टूबर चलेगा। हांलाकि हम सभी यह जानते हैं कि पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है और श्राद्ध व तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही नहीं पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। तो आईए आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर श्राद्ध कर्म करने से पुण्य मिलता है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। 

हरिद्वार: भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में हरिद्वार गंगा के तट पर बसा हुआ एक खूबसूरत शहर है। शाम के समय इसकी खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है। मान्यका के अनुसार, हरिद्वार में गंगा स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है। वहीं हरिद्वार में अंतिम संस्कार करने से उसकी आत्मा सीधे स्वर्ग जाती है। हरिद्वार के नारायणी शिला पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष मिलता है। पुराणों में भी इस बात का वर्णन मिलता है। यहां पर पिंडदान समारोह का भी आयोजन किया जाता है। इस स्थान पर श्राद्ध कर्म करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

मथुरा: भव्य मंदिरों से सुशोभित मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थल भी माना जाता है। यह पवित्र तीर्थ स्थान पिंड दान समारोहों के लिए पसंदीदा स्थानों में से एक है। यमुना नदी के तट पर स्थित बोधिनी तीर्थ, विश्रंती तीर्थ और वायु तीर्थ पर इस तरह के अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। मृतक और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए सात पिंड या चावल में मिक्स गेहूं के आटे से बने गोले, शहद और दूध के साथ प्रसाद के रूप में तैयार किए जाते हैं। इस प्रसाद को मंत्रों के जाप के साथ अर्पित किया जाता है। 

उज्जैन: मध्यप्रदेश का उज्जैन पिंड दान समारोहों के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। यहां पर शिप्रा नदी के तट पर पिंडदान किया जाता है। बता दें कि शिप्रा नदी के किनारे पिंडदान करना लाभकारी माना जाता है। यहां पर असंख्य तीर्थस्थलों के अलावा कालिदास अकैडमी और भर्तृहरि गुफाएं भी स्थित है। उज्जैन से पर्यटक ओंकारेश्वर, बसवारा, भोपाल और चित्तौड़गढ़ समेत कई स्थलों की यात्रा के लिए पहुंचते हैं। 

बोधगया: पितरों के पिंडदान के लिए बिहार में गया एक महत्वपूर्ण स्थाना माना जाता है। फाल्गु नदी के तट पर पिंडदान समारोह आयोजित किया जाता है। मान्यता के अनुसार, कथित शुद्धिकरण शक्तियों के लिए श्राद्ध करने के लिए अहम स्थान है। रामायण और महाभारत दोनों में गयापुरी का उल्लेख मिलता है। गया में पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। गया में महाबोधि मंदिर, ब्रह्मयोनी हिल और अन्य संबंधित स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। 


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