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वैश्विक संकट के बीच पीएम मोदी का मिशन मोड: 27 मार्च को राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ महामंथन

  • Tapas Vishwas
  • March 26, 2026 10:03 AM
PM Modi's Mission Mode Amidst Global Crisis: Mega-Brainstorming Session with State Chief Secretaries on March 27

देहरादून। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बाद उपजे वैश्विक आर्थिक संकट और डगमगाती आपूर्ति श्रृंखला के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमान संभाल ली है। आगामी 27 मार्च को प्रधानमंत्री देश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से उत्तराखंड शासन सहित सभी राज्यों को इस संबंध में आधिकारिक पत्र भेजकर अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल माध्यम से होने वाली इस बैठक में भारत सरकार के कैबिनेट सचिव और अन्य वरिष्ठ नीति-निर्धारक भी शामिल रहेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियां अत्यंत संवेदनशील हैं। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष ने वैश्विक बाजारों, विशेषकर कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक स्तर पर होने वाली कोई भी हलचल सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर असर डालती है। प्रधानमंत्री इस बैठक के माध्यम से राज्यों की तैयारियों का बारीकी से आकलन करना चाहते हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट का प्रभाव घरेलू बाजार पर कम से कम पड़े। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने पत्र की पुष्टि करते हुए बताया कि पीएमओ से प्राप्त निर्देशों के अनुसार 27 मार्च को शाम 6:30 बजे यह वर्चुअल बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान भविष्य की संभावनाओं, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और उनके भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विस्तृत रोडमैप साझा करेंगे।

एजेंडे में क्या है खास?
बैठक का मुख्य केंद्र 'आपातकालीन प्रबंधन' और 'आपूर्ति सुचारू रखना' है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मुख्य एजेंडे में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल के बीच राज्यों में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना।

खाद्य एवं आवश्यक वस्तुएं: यदि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है, तो जरूरी सामानों की कीमतों को नियंत्रित रखना और जमाखोरी रोकना।

लॉजिस्टिक्स और परिवहन: माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स चेन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए राज्यों की कार्ययोजना।

राज्य स्तरीय तैयारियां: राज्यों के पास मौजूद बफर स्टॉक और किसी भी संकट से निपटने के लिए उनके पास उपलब्ध 'इमरजेंसी रिस्पॉन्स' तंत्र का जायजा लेना।

हिमालयी राज्य उत्तराखंड के लिए यह बैठक रणनीतिक रूप से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। राज्य में जल्द ही चारधाम यात्रा और पर्यटन का मुख्य सीजन शुरू होने वाला है। यात्रा काल के दौरान ईंधन और खाद्य पदार्थों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। भौगोलिक कठिनाइयों के कारण यहां आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके अतिरिक्त, अप्रैल के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड दौरा भी प्रस्तावित है। ऐसे में मुख्य सचिव आनंद बर्धन राज्य की विशिष्ट भौगोलिक चुनौतियों और तैयारियों का ब्यौरा प्रधानमंत्री के समक्ष रखेंगे। पीएमओ का पत्र मिलते ही उत्तराखंड शासन में हलचल तेज हो गई है। मुख्य सचिव कार्यालय ने खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा, परिवहन, पेट्रोलियम और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को 'अलर्ट मोड' पर रखते हुए नवीनतम आंकड़े और स्थिति रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह पहल 'प्रो-एक्टिव गवर्नेंस' का उदाहरण है। संकट आने का इंतजार करने के बजाय, समय रहते राज्यों को तैयार करना केंद्र सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैठक का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच एक 'यूनिफाइड कमांड' बनाना है। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत एक साझा रणनीति के तहत काम करेगा, जिससे मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करने और बुनियादी सेवाओं को सुचारू रखने में मदद मिलेगी। 27 मार्च की यह बैठक केवल एक औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकट प्रबंधन तंत्र का एक बड़ा परीक्षण भी साबित होगी।
 


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