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सियासी घमासानः सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत! तिहाड़ जेल भेजे जाने पर राहुल गांधी ने उठाई आवाज

editor
  • Awaaz Desk
  • October 14, 2026 05:10 AM
Political Uproar: Sourav Das and Ashutosh Ranka remanded to 5 days' judicial custody! Rahul Gandhi speaks out after they are sent to Tihar Jail.

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद सियासी विवाद तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजे जाने पर पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सवाल उठाए हैं। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और वे इसे वापस हासिल करेंगे। दूसरी ओर, पुलिस ने सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे को पांच हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरवाने के बाद रिहा कर दिया है। अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, 'आशु और सौरव को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनकी गलती? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना।' दिपके ने सवाल किया कि क्या जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने की कोशिश करना गुनाह है? उन्होंने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए अपने साथियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए। इस मामले में राहुल गांधी ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और वे इसे वापस हासिल करेंगे। उनके बयान से इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।

पुलिस के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों का दोबारा उल्लंघन किया। पुलिस ने दोनों के पिछले आचरण का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पहले रिहाई के दौरान तय की गई शर्तों का भी उल्लंघन किया। इसके बाद अदालत ने दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। हालांकि, न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का अर्थ दोषसिद्धि नहीं है। मंगलवार सुबह सीजेपी के कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग वाले जंतर-मंतर क्षेत्र में पहुंचे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की। इसके बाद सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे समेत कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। अजिंक्य शिंदे को पांच हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया। बताया गया है कि एसईएम अदालत ने उन्हें छह महीने तक शांति भंग नहीं करने की शर्त दी है।

अभिजीत दिपके ने कहा कि सीजेपी और INDIA ब्लॉक के आंदोलन का मकसद एक ही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी एक स्वतंत्र संस्था है और अपनी अलग पहचान बनाए रखेगी। इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी INDIA ब्लॉक के खिलाफ है। इससे पहले शनिवार को भी अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अब दोबारा हुई कार्रवाई के बाद प्रदर्शन की अनुमति, निषेधाज्ञा और विरोध के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है।


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