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बागेश्वर में बारिश बनी आफतः पहाड़ों से लगातार गिर रहे बोल्डर और मलबे! 11 सड़कें बंद होने से तीन दर्जन गांवों की आवाजाही प्रभावित

editor
  • Awaaz Desk
  • August 19, 2026 02:08 PM
Rain wreaks havoc in Bageshwar: Boulders and debris continuously falling from the mountains! Movement in three dozen villages disrupted as 11 roads remain closed.

बागेश्वर। लगातार हो रही बारिश के चलते बागेश्वर जिले के पहाड़ अब कमजोर पड़ने लगे हैं। जिले के कई हिस्सों में लैंडस्लाइड और बोल्डर गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं। सबसे ज्यादा असर कपकोट क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां पहाड़ से लगातार गिर रहे बोल्डर और मलबे के कारण 11 सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। सड़कें बंद होने से करीब तीन दर्जन गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और ग्रामीणों को आवाजाही के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में लगातार जमीन खिसकने और चट्टानों के टूटकर सड़क पर आने का सिलसिला जारी है। कई स्थानों पर ग्रामीण खुद सड़क पर गिरे पत्थरों और मलबे को हटाकर रास्ता खोलने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, कुछ संवेदनशील मार्गों पर अचानक बोल्डर गिरने से वाहन चालकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। कपकोट क्षेत्र के नामती-चेटाबगड़ मार्ग पर बारिश के बीच एक बड़ा हादसा टल गया। बताया जा रहा है कि एक वाहन सड़क से गुजर रहा था, तभी अचानक वाहन के ठीक सामने पहाड़ से बड़ी संख्या में पत्थर और बोल्डर गिरने लगे। पहाड़ से पत्थरों को गिरता देख वाहन चालक के सामने खतरा पैदा हो गया। गनीमत रही कि वाहन बोल्डर गिरने वाली जगह से कुछ पीछे था और पत्थर वाहन से दूरी पर गिरे। इससे किसी तरह का बड़ा हादसा होने से टल गया। घटना के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों में भी दहशत का माहौल है। लगातार बारिश के बीच पहाड़ी सड़कों पर सफर करने वाले वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लगातार बारिश के चलते कपकोट क्षेत्र की कई ग्रामीण सड़कें मलबे और बोल्डर की चपेट में आई हैं। इसके चलते 11 सड़कों पर आवाजाही बंद हो गई है। सड़कें बंद होने से करीब तीन दर्जन गांवों के ग्रामीण प्रभावित हैं। ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की जरूरतों के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार तक पहुंच भी मुश्किल हो गई है। सड़क संपर्क टूटने के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाना और आवश्यक सामान गांव तक पहुंचाना चुनौती बन गया है। आपातकालीन स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान हर साल पहाड़ों में सड़कें बंद होती हैं, लेकिन इस बार लगातार हो रही बारिश के कारण समस्या ज्यादा बढ़ गई है। कई स्थानों पर पहाड़ों से मलबा और बोल्डर गिरने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। बारिश का असर केवल कपकोट क्षेत्र तक सीमित नहीं है। गरुड़ तहसील क्षेत्र में भी लगातार लैंडस्लाइड से ग्रामीण परेशान हैं। रियुनी-लखमार मोटरमार्ग पिछले करीब 15 दिनों से लगातार भूस्खलन के कारण बंद बताया जा रहा है। सड़क बंद होने से आसपास के ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भी मुश्किलें आ रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क खोलने के साथ ही संवेदनशील स्थानों पर लैंडस्लाइड की रोकथाम के स्थायी उपाय करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल मलबा हटाकर सड़क खोलने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, क्योंकि बारिश जारी रहने पर दोबारा पहाड़ से मलबा सड़क पर आ जाता है।


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