उत्तराखंड में उड़ेगा 'पानी वाला जहाज': देश का पहला अनोखा सी-प्लेन सर्किट तैयार,पर्यटन भरेगा नई उड़ान
देहरादून। उत्तराखंड के पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स को दुनिया के नक्शे पर एक नई और बेहद अनूठी पहचान मिलने जा रही है। त्रिवेंद्रम और गुजरात की तर्ज पर अब देवभूमि में देश का सबसे अनोखा 'सी-प्लेन सर्किट' आकार लेने जा रहा है। ऋषिकेश बैराज और टिहरी झील में 'पानी वाले जहाज' की पहली सफल लैंडिंग के ऐतिहासिक परीक्षण के बाद, राज्य सरकार अब इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरे प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में विस्तार देने की तैयारी में जुट गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने कुमाऊं और गढ़वाल के तीन और प्रमुख जलाशयों को सी-प्लेन संचालन के लिए संभावित स्थलों के रूप में चिह्नित (शॉर्टलिस्ट) कर लिया है। इन नए स्थलों पर भी जल्द ही सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए सी-प्लेन की ट्रायल लैंडिंग कराई जाएगी।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के अनुसार, टिहरी और ऋषिकेश के बाद अब सर्किट के तहत जिन नए जलाशयों को जोड़ा जा रहा है, वे हैं। नानकसागर झील (ऊधम सिंह नगर),हरिपुर जलाशय (ऊधम सिंह नगर),कालागढ़ झील (पौड़ी गढ़वाल) इन जलाशयों में वाटर एरोड्रम विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, जिससे कुमाऊं और गढ़वाल के बीच हवाई कनेक्टिविटी का एक नया और रोमांचक गलियारा तैयार होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से राज्य के उन दूरस्थ और छिपे हुए खूबसूरत पर्यटन स्थलों तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा, जहां अभी तक सड़कों के माध्यम से पहुंचने में पर्यटकों का लंबा वक्त जाया होता था। अब सैलानी बेहद कम समय में और आसमान से हिमालय की वादियों व झीलों का विहंगम दृश्य देखते हुए सफर का आनंद ले सकेंगे। इससे न केवल साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर होमस्टे, होटल, गाइड और परिवहन व्यवसाय से जुड़े युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। राज्य सरकार इस पूरी योजना को चरणबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि सुरक्षा और संचालन में कोई कमी न रहे।