पुणे मर्डर केस में सनसनीखेज खुलासा: डिलीट चैट्स, सांकेतिक भाषा और निकनेम से रची गई कथित साजिश! 'जो शादी कभी नहीं होने वाली थी' वाली चैट बनी जांच का नया आधार
पुणे। महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस की जांच के दौरान अब सिया गोयल के मोबाइल फोन से डिलीट की गई चैट्स रिकवर होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन चैट्स से हत्या की कथित साजिश से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस के अनुसार सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने जांच एजेंसियों और अन्य लोगों की नजरों से बचने के लिए सांकेतिक भाषा और अलग-अलग निकनेम का इस्तेमाल कर आपस में बातचीत की थी। अब इन सभी बातचीतों और उनसे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों ने मोबाइल डेटा डिलीट करने की भी कोशिश की थी, लेकिन साइबर फॉरेंसिक टीम ने कई चैट्स और डिजिटल रिकॉर्ड को रिकवर कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन संदेशों का वास्तविक अर्थ क्या था और क्या इन्हीं के माध्यम से कथित हत्या की पूरी योजना तैयार की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि मामले में मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण कराया जा रहा है, ताकि हर पहलू की पुष्टि वैज्ञानिक आधार पर की जा सके।
14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
मामले की सुनवाई के दौरान स्थानीय अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों की तीन दिन की अतिरिक्त पुलिस हिरासत की मांग करते हुए अदालत से कहा था कि दोनों से आमने-सामने पूछताछ आवश्यक है, जिससे उनकी सांकेतिक बातचीत, कथित कोड वर्ड्स और हत्या की साजिश से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके। हालांकि अदालत ने अतिरिक्त पुलिस हिरासत की मांग स्वीकार नहीं की। जांच अधिकारी मनोज पवार ने अदालत को बताया कि पुलिस ने उस स्थान का पंचनामा भी किया है, जहां सिया द्वारा कथित रूप से केतन अग्रवाल का पासपोर्ट फाड़े जाने की आशंका है। इसके अलावा कुछ कपड़े भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस के अनुसार सिया के दूसरे मोबाइल फोन की जांच के दौरान भी कई संदिग्ध कोड आधारित बातचीत सामने आई है, जिनकी पड़ताल जारी है। वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि अब तक की जांच में कोई नया ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, इसलिए अतिरिक्त पुलिस हिरासत की आवश्यकता नहीं है।
नार्को टेस्ट पर अदालत की टिप्पणी, स्नैपचैट चैट भी जांच के घेरे में
सुनवाई के दौरान नार्को टेस्ट का मुद्दा भी उठा। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी का नार्को टेस्ट उसकी सहमति के बिना नहीं कराया जा सकता। चूंकि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने इस जांच प्रक्रिया के लिए सहमति नहीं दी, इसलिए अदालत ने नार्को टेस्ट की अनुमति देने से इनकार कर दिया। अभियोजन पक्ष ने भी अदालत में कहा कि फिलहाल उपलब्ध डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है और नार्को टेस्ट आवश्यक नहीं माना गया। जांच के दौरान स्नैपचैट पर हुई एक कथित बातचीत भी पुलिस के संज्ञान में आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस चैट में सिया गोयल कथित रूप से अपने एक मित्र से फ्लाइट टिकट बुक कराने के लिए आधार कार्ड की कॉपी मांगती नजर आई। बातचीत में कथित रूप से यह भी कहा गया कि टिकट उस शादी के लिए बुक कराए जाने थे, जो कभी होने ही नहीं वाली थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या कथित फ्लाइट बुकिंग की योजना हत्या की साजिश का हिस्सा थी, जिससे यह आभास कराया जा सके कि शादी की तैयारियां सामान्य रूप से चल रही हैं और किसी को किसी अनहोनी का संदेह न हो। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी इस कथित चैट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और इसकी सत्यता का सत्यापन किया जा रहा है।