संत समाज राष्ट्र चेतना का संवाहक: संत सम्मेलन में सीएम धामी का बड़ा ऐलान, उत्तराखण्ड को बनाएंगे विश्व की आध्यात्मिक राजधानी
हरिद्वार। देवभूमि उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि संत समाज भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्र चेतना का सबसे बड़ा संवाहक है। उन्होंने कहा कि संतों ने सदियों से समाज को दिशा देने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने यह बात देहरादून स्थित हरि सेवा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं विशाल संत सम्मेलन में कही। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उपस्थित संत-महात्माओं का अभिनंदन करते हुए आश्रम द्वारा किए जा रहे सेवा, संस्कार और समाज जागरण के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह मानवता को आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए युग का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का विस्तार, महाकाल लोक का विकास और केदारनाथ धाम के पुनर्विकास जैसे ऐतिहासिक कार्य देश की आध्यात्मिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों से भारत की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत हुई है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता और आध्यात्मिक पहचान की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और भू-कानून जैसे महत्वपूर्ण फैसले लागू किए गए हैं। साथ ही सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने की दिशा में सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना की गई है। यहां भारतीय दर्शन, संस्कृति और सभ्यता पर उच्च स्तरीय अध्ययन एवं शोध कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा हरिद्वार में प्राच्य शोध संस्थान की स्थापना की प्रक्रिया भी चल रही है, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने स्वामी हरिचेतानंद जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए संत समाज से राज्य और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद देने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास जताया कि संतों के आशीर्वाद, जनसहयोग और सरकार की प्रतिबद्धता के बल पर उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का सपना अवश्य साकार होगा। संत सम्मेलन में मुख्यमंत्री के इस बड़े बयान ने उत्तराखण्ड को वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की सरकार की मंशा को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में यह घोषणा आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।