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फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर देशभर में बवाल! टाइटल को लेकर विरोध, मनोज बाजपेयी बोले- मैं भावनाओं को समझता हूं और...

  • Awaaz Desk
  • February 06, 2026 07:02 AM
The film "Ghuskhor Pandit" sparked nationwide uproar. Protests over the title sparked widespread protests, with Manoj Bajpayee saying, "I understand the sentiments and..."

नई दिल्ली। अभिनेता मनोज वाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। देशभर में फिल्म के नाम को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे है। इस मामले में जहां एफएमसी ने भी फिल्म के अनअथराइज्ड टाइटल को लेकर मेकर्स को नोटिस भेजा है, वहीं यूपी सरकार ने फिल्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया है। अब लगातार विरोध बढ़ने के बाद फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी ने एक बयान जारी कर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दिया है। दोनों ने फिल्म के उद्देश्य और टाइटल को लेकर भी सफाई दी है। साथ ही प्रमोशनल चीजें हटाने की भी बात कही है। मनोज बाजपेयी ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए लिखा, ‘लोगों द्वारा साझा की गई भावनाओं और चिंताओं का मैं सम्मान करता हूं और उन्हें गंभीरता से लेता हूं। जब आप जिस चीज का हिस्सा होते हैं, उससे कुछ लोगों को ठेस पहुंचती है, तो यह आपको रुककर उनकी बात सुनने के लिए मजबूर कर देता है। एक अभिनेता के रूप में, मैं किसी फिल्म में अपने द्वारा निभाए जा रहे किरदार और कहानी के माध्यम से ही प्रवेश करता हूं। मेरे लिए यह एक गलत व्यक्ति और उसकी आत्म-साक्षात्कार की यात्रा के बारे में था। इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय के बारे में कोई टिप्पणी करना नहीं था।

नीरज पांडे के साथ काम करने के अपने अनुभव में मैंने देखा है कि वो अपनी फिल्मों के प्रति हमेशा गंभीरता और सावधानी बरतते हैं। जनता की भावनाओं को देखते हुए फिल्म निर्माताओं ने प्रचार सामग्री को हटाने का निर्णय लिया है। यह इस बात को दर्शाता है कि चिंताओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है। बता दें कि ‘घूसखोर पंडित’ की घोषणा होते ही फिल्म के टाइटल में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है। इसे ब्राह्मण समुदाय का अपमान बताया है। अब विवाद बढ़ने पर नीरज पांडे ने इंस्टाग्राम पर अपना एक लंबा-चौड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। अपने बयान में नीरज पांडे ने कहा, हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है। इसमें पंडित शब्द का प्रयोग केवल एक काल्पनिक पात्र के बोलचाल के नाम के रूप में किया गया है। कहानी एक व्यक्ति के कामों और विकल्पों पर केंद्रित है। किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी या प्रतिनिधित्व नहीं करती है। एक फिल्म निर्माता के रूप में मैं अपने काम को गहरी जिम्मेदारी की भावना के साथ करता हूं, ऐसी कहानियां कहना जो अच्छी और सम्मानजनक हों।

 


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