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उत्तराखंड में 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड का अस्तित्व होगा खत्म, अब 'अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' के अधीन चलेंगे संस्थान

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 23, 2026 09:06 AM
The Madrasa Board in Uttarakhand will cease to exist from July 1; institutions will now operate under the 'Minority Education Authority'.

देहरादून। उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शैक्षणिक ढांचों और मदरसों को लेकर राज्य सरकार ने एक बेहद युगांतकारी और बड़ा फैसला लिया है। आगामी 1 जुलाई से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त होने जा रहा है। इसके स्थान पर राज्य में 'उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम' के तहत नवगठित 'राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।

इस बदलाव के बाद न सिर्फ मुस्लिम समुदाय के मदरसे, बल्कि सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय द्वारा संचालित सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान भी अब सीधे तौर पर इसी एकल प्राधिकरण के दायरे में आ जाएंगे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य में संचालित ऐसे मदरसों और अल्पसंख्यक संस्थानों को ही 'पीएम पोषण योजना' (मध्याह्न भोजन / मिड-डे मील) का लाभ दिया जाएगा, जो अनिवार्य रूप से विद्यालयी शिक्षा विभाग से संबद्ध होंगे। प्राधिकरण इसके लिए जल्द ही विद्यालयी शिक्षा विभाग को एक आधिकारिक पत्र भेजने जा रहा है। इसके साथ ही, जिन मदरसों ने संबद्धता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है, उनके मामलों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश शिक्षा विभाग को दिए गए हैं। बैठक में यह भी तय किया गया है कि राज्य के जो मदरसे शिक्षा विभाग के तय मानकों और नियमों को पूरा करते हैं, उन्हें मान्यता देने में प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे मदरसे जो अपने नाम के साथ 'जूनियर हाईस्कूल', 'हाईस्कूल' या 'इंटरमीडिएट' स्तर की मुख्यधारा की मान्यता प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें शिक्षा विभाग के प्रचलित नियमों के अनुरूप सभी जरूरी सुविधाएं और समान अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए संस्थानों को मान्यता संबंधी नियमावली के अनुसार अपने समस्त वैध अभिलेखों (दस्तावेजों) के साथ आवेदन करना होगा। प्राधिकरण द्वारा अब मदरसों सहित सभी अल्पसंख्यक स्कूलों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुसार आधुनिक पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। शासन से अंतिम अनुमोदन मिलते ही इसे पूरे राज्य में एक समान रूप से लागू कर दिया जाएगा, ताकि इन संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक और प्रतिस्पर्धी शिक्षा मिल सके। सरकार के इस कदम से राज्य के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और शिक्षा के स्तर में सुधार आने की उम्मीद है। शासन ने साफ किया है कि इस बदलाव का उद्देश्य किसी को रोकना नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को मुख्यधारा की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से जोड़ना है। 1 जुलाई से होने वाले इस बड़े प्रशासनिक बदलाव को लेकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं।


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