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देवभूमि की बुजुर्ग माताओं का दर्द: 1.34 लाख महिलाओं को 'अपनों' और 'सरकार' के सहारे की दरकार,सर्वे ने खोली हकीकत

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 09, 2026 08:04 AM
The Plight of Elderly Mothers in the 'Land of Gods': 134,000 Women Are in Need of Support from Both 'Loved Ones' and the 'Government'—A Survey Reveals the Stark Reality.

देहरादून। उत्तराखंड में बुजुर्ग महिलाओं के जीवन स्तर और उनकी जरूरतों को लेकर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा कराया गया सर्वे एक विचलित करने वाली तस्वीर पेश कर रहा है। सर्वे रिपोर्ट के आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश की 1 लाख 34 हजार से अधिक बुजुर्ग महिलाएं उम्र के इस पड़ाव पर बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हैं और उन्हें सरकारी मदद की सख्त आवश्यकता है।

सर्वे के अनुसार, बुजुर्ग महिलाओं के सामने सबसे बड़ा संकट आजीविका और इलाज का है। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक 61,258 महिलाओं को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता की दरकार है। वहीं, 23,643 महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें नियमित स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की आवश्यकता है। पहाड़ों के कठिन जीवन के बीच 4,330 महिलाओं ने स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हुए सुरक्षा की मांग की है। इसके अलावा, 27,125 को बेहतर पोषाहार और 6,474 को सिर छिपाने के लिए पक्के आवास की जरूरत है। रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रदेश की 33,722 बुजुर्ग महिलाएं ऐसी हैं, जो वर्तमान में किसी भी प्रकार की पेंशन (वृद्धा, विधवा या दिव्यांग) का लाभ नहीं ले पा रही हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं की पहुंच अभी भी एक बड़े तबके तक नहीं हो पाई है। वर्तमान में 71,397 महिलाएं वृद्धावस्था पेंशन, 27,896 विधवा पेंशन और 1,339 दिव्यांग पेंशन का लाभ ले रही हैं। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर यह डेटा जुटाया गया है। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि उन तक मदद पहुंचाना है। सर्वे के आधार पर अब इन महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें संबंधित योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें दवा, राशन, पेंशन और आवास उपलब्ध कराया जा सके। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल डेटाबेस के तैयार होने से अब बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और पात्र महिलाओं को सीधे लाभ मिलेगा। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि वे समाज में सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकेंगी।


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