• Home
  • News
  • The Plight of the Mountains: No young men left in the village to carry the *doli* (palanquin); SSB jawans stepped in to shoulder the burden for a sick woman! The lack of roads, employment, and healthcare facilities has revealed a grim picture of mass migration.

पहाड़ का दर्दः गांव में नहीं बचे डोली उठाने वाले युवा, बीमार महिला को कंधा देने पहुंचे एसएसबी के जवान! सड़क, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव ने पलायन की भयावह तस्वीर दिखाई

editor
  • Awaaz Desk
  • July 03, 2026 01:07 PM
The Plight of the Mountains: No young men left in the village to carry the *doli* (palanquin); SSB jawans stepped in to shoulder the burden for a sick woman! The lack of roads, employment, and healthcare facilities has revealed a grim picture of mass migration.

पिथौरागढ़। पहाड़ों में सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार को लेकर वर्षों से किए जा रहे विकास के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। नेपाल सीमा से लगे पिथौरागढ़ जिले के जमतड़ी गांव की एक घटना ने यह दिखा दिया कि आज भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क के अभाव और लगातार हो रहे पलायन के कारण गांवों में बुजुर्गों के अलावा कोई नहीं बचा है। ऐसे में जब किसी बीमार या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है तो सबसे बड़ी चुनौती उसे मुख्य सड़क तक पहुंचाने की होती है। विगत बुधवार को जमतड़ी गांव की 60 वर्षीय कलछा देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन गांव तक सड़क न होने के कारण उन्हें डोली के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना ही एकमात्र विकल्प था। मुश्किल यह थी कि डोली उठाने के लिए गांव में पर्याप्त युवा मौजूद नहीं थे। रोजगार की तलाश में अधिकांश युवक वर्षों पहले ही गांव छोड़ चुके हैं और अब गांव में मुख्य रूप से बुजुर्ग ही रह गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) से मदद की अपील की। सूचना मिलते ही 55वीं वाहिनी एसएसबी के आठ से अधिक जवान तत्काल गांव पहुंचे। प्रभारी उप निरीक्षक उत्तम सिंह के नेतृत्व में जवानों ने स्वयं डोली उठाई और दुर्गम पैदल रास्तों से होते हुए कलछा देवी को सुरक्षित मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां पहले से मौजूद वाहन के जरिए उन्हें अस्पताल के लिए रवाना किया गया।

ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब गांव के लोगों को ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा हो। सड़क सुविधा के अभाव में बीमारों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को कई किलोमीटर तक पैदल या डोली के सहारे ले जाना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह परेशानी और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि रास्ते फिसलन भरे और जोखिमपूर्ण हो जाते हैं। जमतड़ी गांव की यह घटना पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन की गंभीर तस्वीर भी सामने लाती है। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। परिणामस्वरूप गांवों में केवल बुजुर्ग रह गए हैं, जो रोजमर्रा के कार्यों के साथ-साथ आपात परिस्थितियों में भी असहाय नजर आते हैं। डोली उठाने के लिए भी युवा कंधे न मिलना इसी बदलते सामाजिक परिदृश्य की दर्दनाक हकीकत है। एसएसबी के प्रभारी उप निरीक्षक उत्तम सिंह ने कहा कि सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सहायता करना भी बल की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि किसी भी आपात स्थिति में एसएसबी हमेशा लोगों की मदद के लिए तत्पर रहती है और भविष्य में भी ऐसे मानवीय कार्य जारी रहेंगे। ग्रामीणों ने एसएसबी के जवानों का आभार व्यक्त किया।


संबंधित आलेख: