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पद्मश्री बसंती देवी के संघर्षों की कहानीः छोटी उम्र में शादी, पति की मौत और फिर पढ़ाई! लिंक में पढ़ें बंसती देवी का जल, जंगल, जमीन से लेकर राष्ट्रपति सम्मान तक का सफर

editor
  • Kanchan Verma
  • March 29, 2022 07:03 AM
The story of Padmashree Basanti Devi's struggles: marriage at a young age, husband's death and then studies! Read in the link Basati Devi's journey from water, forest, land to President's honor

मात्र 14 वर्ष की आयु में पति का निधन,ससुराल में आये दिन ताने,और प्रताड़ना झेलने वाली उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की बसंती देवी के संघर्षों की कहानी ऐसी है कि आपकी आंखों में आसूं आ जाये। पति की मौत के बाद जल जंगल और ज़मीन को ही उन्होंने अपना सबकुछ मान लिया और कोसी नदी को पुनर्जीवित करने में दिन रात मेहनत करने लगी। उत्तराखंड की बसंती देवी को उनके उल्लेखनीय कार्यो के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
साधारण सी सूती धोती,पैरों में सामान्य चप्पल पहने राष्ट्रपति भवन में बसंती देवी का नाम जब पुकारा गया तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल गूंज उठा। उत्तराखंड की सादगी,संस्कृति, और मेहनत के गुण उनके व्यक्तित्व में साफ झलक रहे थे। पद्मश्री का पुरस्कार हर किसी को और आसानी से नही मिलता इसके लिए कड़ी मेहनत और संघर्ष करना पड़ता है। 14 साल की उम्र में आज जब बच्चे सड़को पर खेलते है उसी खेलने की उम्र में बसंती देवी के पति की मौत हो चुकी थी। एक विधवा की ज़िंदगी जीते हुए उन्हें ससुराल में कई प्रताड़नाएं झेलनी पड़ी। पिता ने साथ दिया तो बसंती देवी मायके आ गयी और 12 तक पढ़ाई पूरी की। बसंती देवी की मुलाकात समाज सेविका राधा से हुई और उनके साथ ही बसंती कौसानी के लक्ष्मी आश्रम में आकर बस गयी।उन्होंने आश्रम से ही पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना शुरू किया । कोसी नदी को पुनर्जीवित करने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।


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