मातृशक्ति का संघर्ष ही उत्तराखंड की पहचान: महिला दिवस पर सीएम धामी ने वरिष्ठ महिलाओं को किया सम्मानित
देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को मुख्य सेवक सदन में वरिष्ठ मातृशक्ति सम्मान कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से आई वरिष्ठ महिलाओं, विशेषकर दादियों और नानियों को उनके जीवनभर के संघर्ष और समाज निर्माण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस वर्ष महिला दिवस का आयोजन विशेष रूप से बुजुर्ग महिलाओं के सम्मान और उनके अनुभवों को समर्पित रहा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की बुजुर्ग महिलाओं के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महिला दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि माताओं, बहनों और विशेषकर वरिष्ठ मातृशक्ति के त्याग, तपस्या और संघर्ष को नमन करने का दिन है। उन्होंने कहा कि दादियां और नानियां केवल परिवार की सदस्य नहीं होतीं, बल्कि वे अनुभवों की जीवित पाठशाला होती हैं, जिनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से नई पीढ़ी संस्कार और मूल्यों को सीखती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण यहां की मातृशक्ति के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। पहाड़ की महिलाओं ने विषम परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी और अपने श्रम, धैर्य तथा साहस से परिवार और समाज को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जब हम एक सशक्त उत्तराखंड की कल्पना करते हैं तो उसके केंद्र में मातृशक्ति ही खड़ी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य माताओं और बहनों के चेहरे पर मुस्कान लाना है। क्योंकि जब एक महिला सशक्त होती है तो पूरा परिवार और समाज मजबूत बनता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश महिला नेतृत्व वाले विकास के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है और उसी दिशा में उत्तराखंड सरकार भी अनेक योजनाएं लागू कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की है, ताकि बेटियां आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही ‘लखपति दीदी’ योजना के माध्यम से प्रदेश की पांच लाख महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अंत्योदय निःशुल्क गैस रिफिल योजना और स्वयं सहायता समूहों को दी जा रही सहायता भी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में लागू की गई समान नागरिक संहिता (उत्तराखंड) विशेष रूप से महिलाओं को सुरक्षा, समानता और सम्मान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। इससे समाज में व्याप्त कई कुरीतियों पर रोक लगेगी और महिलाओं को उनके कानूनी अधिकार मजबूती से मिल सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनका सम्मान करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी नीतियां बना रही है, जिससे बुजुर्ग माताओं को स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए किसी पर निर्भर न रहना पड़े। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इस बार का महिला दिवस उन वरिष्ठ महिलाओं को समर्पित है जिन्होंने अपने कठिन परिश्रम और त्याग से परिवारों और समाज को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अक्सर विकास की चर्चाओं में बुजुर्ग महिलाएं पीछे रह जाती हैं, लेकिन अब सरकार उनके लिए विशेष योजनाएं तैयार कर रही है। रेखा आर्या ने बताया कि विभाग द्वारा दूरदराज के क्षेत्रों में वृद्ध महिलाओं की जरूरतों का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि उन्हें स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सहायता का सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि घर की दहलीज से शुरू होने वाला सशक्तिकरण ही वास्तविक सशक्तिकरण है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कई वरिष्ठ महिलाओं को सम्मानित किया और उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।